शिव कुमार, शिलचर, 19 जुलाई। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत और अमर शहीद मंगल पांडेय की 199वीं जयंती के अवसर पर रविवार को शीलचर के घुंघूर स्थित मंगल पांडेय चौक में श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के वातावरण के बीच भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों तथा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अमर शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का आयोजन शहीद मंगल पांडेय स्थापना समिति द्वारा किया गया। उपस्थित लोगों ने देश की स्वतंत्रता के लिए मंगल पांडेय के अद्वितीय बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
समिति के सचिव प्रदीप कुर्मी ने कहा कि आज अमर शहीद मंगल पांडेय की 199वीं जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में घुंघूर में मंगल पांडेय की प्रतिमा स्थापित होने के बाद से समिति प्रत्येक वर्ष चार प्रमुख कार्यक्रम आयोजित करती है, जिनमें उनकी जयंती, शहादत दिवस, 26 जनवरी और 15 अगस्त शामिल हैं। उन्होंने सभी अतिथियों, मार्गदर्शक मंडल के सदस्यों तथा स्थानीय लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समिति का उद्देश्य नई पीढ़ी को मंगल पांडेय के जीवन, संघर्ष और बलिदान से परिचित कराना है।
उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर हुई एक टिप्पणी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कई लोग इतिहास की सही जानकारी के अभाव में ऐसी बातें लिख देते हैं। उनका मानना है कि यह दुर्भावना से अधिक जानकारी की कमी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में अमर शहीद मंगल पांडेय की 200वीं जयंती के अवसर पर समिति एक माह तक विभिन्न जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगी, ताकि अधिक से अधिक लोग उनके योगदान से परिचित हो सकें।
प्रदीप कुर्मी ने यह भी कहा कि इतिहास में 1857 के आंदोलन को लंबे समय तक केवल “सिपाही विद्रोह” कहकर प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तव में मंगल पांडेय ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता की वह पहली चिंगारी प्रज्वलित की, जिसने आगे चलकर पूरे देश में आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि मंगल पांडेय केवल एक सैनिक नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम महानायक थे।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी, कछाड़ जिला के सचिव अमिताभ राय ने कहा कि अमर शहीद मंगल पांडेय का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उन्होंने कहा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक मंगल पांडेय ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध जिस साहस के साथ आवाज उठाई, उसी से स्वतंत्रता आंदोलन की नींव मजबूत हुई और अंततः देश को 1947 में आजादी मिली। उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल श्रद्धांजलि देने का नहीं, बल्कि देशभक्ति, साहस और राष्ट्रसेवा की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष घुंघूर में मंगल पांडेय की प्रतिमा स्थापित होने के बाद यह स्थान राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन गया है। आज बड़ी संख्या में समिति के सदस्य, स्थानीय नागरिक और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग यहां एकत्र होकर अमर शहीद को श्रद्धापूर्वक नमन कर रहे हैं।
गौरतलब है कि मंगल पांडेय का जन्म 19 जुलाई 1827 को हुआ था। उन्होंने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की दमनकारी नीतियों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था। उनके साहसिक कदम ने पूरे देश में स्वतंत्रता की अलख जगाई और यही आंदोलन आगे चलकर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में इतिहास में दर्ज हुआ। इसी कारण उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रथम क्रांतिकारी और प्रेरणास्रोत माना जाता है।
कार्यक्रम में समाजसेवी बाबुल नारायण कानू, सुभाष चौहान, भाजपा कछाड़ जिला सचिव अमिताभ राय, चातला मंडल अध्यक्ष मानव सिंह, कंचन नुनिया, साधु ग्वाला, जिला परिषद सदस्या श्रीमती सरस्वती रविदास, सुबचन ग्वाला, प्रभुनाथ सोनार, रामनारायण नुनिया, बैकुंठ ग्वाला सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने अमर शहीद मंगल पांडेय की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।