शिलचर के होली क्रॉस स्कूल में छात्र विवाद: स्कूल प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश

प्रेरणा ब्यूरो शिलचर, 17 जूलाई: असम मानवाधिकार आयोग द्वारा कक्षा पांच के एक छात्र के साथ कथित शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न के मामले में मजिस्ट्रेट स्तर की जांच के आदेश दिए जाने के बाद शुक्रवार को शिलचर के होली क्रॉस हायर सेकेंडरी स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही, आरोपों का सामना कर रही शिक्षिका तथा विद्यालय प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष विस्तार से रखा।

विद्यालय परिसर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्राचार्या सिस्टर टेरेसा मार्टिस ने बताया कि घटना की शुरुआत 15 मई को टिफिन अवकाश के दौरान कक्षा पांच के दो छात्रों—आयान शर्मा और अली सरफराज—के बीच हुए विवाद से हुई थी। उनके अनुसार, घटना के तुरंत बाद दोनों छात्रों को अलग बैठाकर मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा दिया गया था।

उन्होंने बताया कि 16 मई को एक अभिभावक ने व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 20 मई को दोनों छात्रों के अभिभावकों को विद्यालय बुलाकर आपसी सहमति से मामले का समाधान निकालने का प्रयास किया गया।

मामले में आरोपित कक्षा शिक्षिका कुमकुम नाथ ने भी सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि शुरुआत में आयान ने शिकायत की थी कि अली ने उसके साथ मारपीट की, जबकि अली का कहना था कि पहले आयान ने उस पर हाथ उठाया था। कक्षा के कुछ विद्यार्थियों के बयान के अनुसार भी पहले आयान ने हमला किया था, जिसके बाद अली ने प्रतिक्रिया दी। घटना के बाद दोनों छात्रों ने एक-दूसरे से माफी मांगी और मामला कक्षा में ही समाप्त हो गया।

कुमकुम नाथ ने कहा, “एक कक्षा शिक्षिका के रूप में मैंने परिस्थितियों के अनुसार वही किया जो मुझे उचित लगा। विद्यालय में शारीरिक दंड (कॉर्पोरल पनिशमेंट) के खिलाफ सख्त नीति लागू है।”

उन्होंने बताया कि उनकी कक्षा में 54 छात्र-छात्राएं हैं और किसी भी विद्यार्थी ने उनके खिलाफ शारीरिक उत्पीड़न के आरोपों की पुष्टि नहीं की है। उन्होंने कहा कि 30 वर्षों के शिक्षकीय जीवन में उन पर कभी ऐसा आरोप नहीं लगा। इस पूरे घटनाक्रम से वह और विद्यालय की प्राचार्या मानसिक रूप से काफी आहत हुई हैं तथा उन्हें कुछ दिनों का अवकाश भी लेना पड़ा।

विद्यालय के अन्य शिक्षकों, पूर्व विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी कुमकुम नाथ के समर्थन में बयान दिया। सह-शिक्षिका सुचिस्मिता गुप्ता ने उन्हें विद्यालय की सर्वश्रेष्ठ शिक्षिकाओं में से एक बताया। पूर्व छात्र एवं वर्तमान शिक्षक महुल मित्र ने कहा कि विद्यालय में किसी भी प्रकार की शारीरिक सजा को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाता तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। पूर्व छात्रा मधुरिमा नाथ और शिक्षिका इप्सिता दत्ता ने भी कुमकुम नाथ के चरित्र और शिक्षण शैली की सराहना की।

विद्यालय प्रशासन का दावा है कि जांच प्रक्रिया से असंतुष्ट एक अभिभावक ने बाद में प्राचार्या और कुमकुम नाथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। प्रबंधन के अनुसार, शिकायतकर्ता मम्पी कर्मकार ने 24 मई को सोशल मीडिया पर एक रील पोस्ट की, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया। उसी दिन विद्यालय निरीक्षक ने पहुंचकर मामले के समाधान का प्रयास किया तथा अभिभावकों को आश्वस्त किया गया कि संबंधित छात्र का पूरा ध्यान रखा जाएगा। हालांकि, विद्यालय का आरोप है कि इसके बाद भी शिकायतकर्ता पक्ष लगातार दबाव बनाता रहा और कुमकुम नाथ को धमकियां भी दी गईं।

उधर, असम मानवाधिकार आयोग ने पूरे मामले की मजिस्ट्रेट स्तर पर जांच कराने के लिए कछार जिला प्रशासन को निर्देश दिया है तथा विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग ने मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त 2026 को निर्धारित की है। जांच पूरी होने तक छात्र पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप और विद्यालय प्रशासन का पक्ष—दोनों ही जांच के दायरे में रहेंगे।

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