उधारबंद में श्रद्धा और उत्साह के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा क्षेत्र

नीहार कांति राय, उधारबंद (प्रेरणा भारती)

रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। कभी ऊंचे-ऊंचे लकड़ी के रथ, रंग-बिरंगी कागज़ी झालरों और पत्तों से सजे भव्य रथ, मिट्टी के खिलौनों से सजी मेले की रौनक तथा मोटी रस्सियों से रथ खींचने की सामूहिक परंपरा इस पर्व की विशेष पहचान हुआ करती थी। आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ आज भी लोगों की स्मृतियों को ताज़ा कर देती है। समय के साथ स्वरूप में कुछ बदलाव अवश्य आया है, लेकिन रथयात्रा की परंपरा और श्रद्धा आज भी अक्षुण्ण बनी हुई है।

इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गुरुवार को उधारबंद में भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुई। रथयात्रा को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। सुबह से ही विभिन्न अखाड़ों और पूजा मंडपों में विशेष पूजा-अर्चना की गई तथा दोपहर में श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरित किया गया।

उधारबंद के कालाचांद अखाड़ा, दीप भट्टाचार्य के आवास तथा स्वर्गीय गौरी शर्मा के घर स्थित मंडप में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शाम लगभग पांच बजे इन तीनों स्थानों से भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को सुसज्जित रथों पर विराजमान कर शोभायात्रा निकाली गई।

रथ की रस्सी खींचने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूरे मार्ग में “जय जगन्नाथ” के जयघोष और संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। विभिन्न स्थानों पर रथ रोककर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और श्रद्धापूर्वक प्रणाम अर्पित किया।

रथयात्रा के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। उधारबंद के पुलिस अधिकारी चिरंजीव बरा के नेतृत्व में विभिन्न स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

रथयात्रा के दौरान प्रेरणा भारती से बातचीत में स्वर्गीय गौरी शर्मा स्मृति मंडप रथयात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष निरेश्वर सिंह (मना) ने बताया कि उनके मंडप का रथ कई दशक पुराना है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के सहयोग और उत्साह के साथ रथयात्रा अत्यंत हर्षोल्लास एवं शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।

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