शिलचर, 16 जुलाई। ग्रीष्मावकाश को केवल अवकाश का समय न मानकर बच्चों के लिए कला, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच बनाने के उद्देश्य से उधारबंद विधानसभा क्षेत्र के चार विद्यालयों में गुरुवार से पंद्रह दिवसीय ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। असम सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग की पहल तथा कछार जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला के संचालन की जिम्मेदारी पालंघाट शिवदुर्गा क्लब ने संभाली है।
कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन शिलचर के डीएनएनके स्कूल में आयोजित समारोह के साथ हुआ। इसके साथ ही तारापुर गर्ल्स हाई स्कूल, गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल तथा उधारबंद प्रैक्टिसिंग गवर्नमेंट सीनियर बेसिक स्कूल में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया। डीएनएनके स्कूल में पहले ही दिन लगभग 50 विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।
उद्घाटन समारोह में जिला सांस्कृतिक अधिकारी स्नेहांशु शेखर राय ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। संगीत, नृत्य, नाटक और चित्रकला जैसी रचनात्मक गतिविधियां बच्चों की कल्पनाशक्ति, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ग्रीष्मकालीन अवकाश को विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और सृजनात्मक अनुभव में बदलना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से अनेक नई प्रतिभाएं सामने आएंगी, जो भविष्य में जिले की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक समृद्ध करेंगी।
शिवदुर्गा क्लब के सलाहकार लालन प्रसाद गोयाला ने स्वागत भाषण में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा नई पीढ़ी को कला और संस्कृति से जोड़ने की पहल समय की मांग है। उन्होंने कहा कि विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। इस जिम्मेदारी का निर्वहन करने का अवसर मिलने पर क्लब स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है और कार्यशाला की सफलता के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेगा।
उधारबंद के विधायक राजदीप गोयाला के प्रतिनिधि असीम देव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के इन पंद्रह दिनों का पूरा लाभ उठाएं और प्रशिक्षकों द्वारा दी जाने वाली प्रत्येक शिक्षा को पूरी लगन से सीखें। उन्होंने शिवदुर्गा क्लब की दीर्घकालीन सांस्कृतिक गतिविधियों की भी सराहना की।
शिक्षक अरुणाभ दे ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को नियमित रूप से कार्यशाला में भेजने के साथ-साथ उन्हें निरंतर प्रोत्साहित भी करें, क्योंकि परिवार का सहयोग ही बच्चों की प्रतिभा को निखारने की सबसे बड़ी शक्ति है।
नृत्य प्रशिक्षक शुभ्रांशु नाथ मजूमदार ने विद्यार्थियों से कहा कि नियमित उपस्थिति और अनुशासित अभ्यास से ही प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। चित्रकला का प्रशिक्षण कलाकार विशाल दास द्वारा दिया जा रहा है।
इस अवसर पर शिक्षक संदीप देवनाथ, शिवदुर्गा क्लब के सचिव बाबलू दास तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
आगामी पंद्रह दिनों तक चारों विद्यालयों में संगीत, नृत्य, नाटक और चित्रकला की व्यावहारिक प्रशिक्षण कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों की सृजनात्मक प्रतिभा को विकसित करते हुए ग्रीष्मावकाश को शिक्षा, संस्कृति और आनंद के समन्वित उत्सव में परिवर्तित करना है।