कवि रवि प्रताप सिंह रायबरेली में हुए सम्मानित

कोलकाता/रायबरेली:15 जुलाई, 2026 बैसवारा की साहित्यिक परंपरा, सांस्कृतिक अस्मिता और रचनात्मक चेतना का अद्भुत दृश्य उस समय देखने को मिला, जब नवगीत के श्लाका पुरुष डॉ. शिवबहादुर सिंह भदौरिया की जयंती पर लालगंज में आयोजित अलंकरण समारोह, काव्यांजलि एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम साहित्य का महाकुंभ बन गया। यह आयोजन केवल एक स्मृति समारोह नहीं, बल्कि बैसवारा की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त संकल्प भी बनकर उभरा। उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कहा कि बैसवारा की धरती ने हिंदी साहित्य को ऐसे मनीषी दिए हैं, जिनकी रचनाएं समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होती जाएंगी। उन्होंने कहा कि “कविता भारतीय संस्कार का अभिन्न अंग है और संस्कार ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान हैं।” उनके संबोधन ने पूरे सभागार को साहित्य और संस्कृति के प्रति नए उत्साह से भर दिया।

मंत्री जी के द्वारा सबसे बड़ी घोषणा यह हुई कि 2026 में फिर सजेगा ‘बैसवारा महोत्सव’। समारोह में राष्ट्रीय साहित्यिक ‘शब्दाक्षर’ के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह के साथ ही तीन अन्य विभूतियां प्रतिष्ठित सम्मानों से  अलंकृत हुईं।

आयोजन में जिन साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली चार विभूतियों को प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया, उनमें डॉ. राधेश्याम गुप्ता (दिल्ली) को डॉ. शिवबहादुर सिंह भदौरिया सम्मान, डॉ. गणेश नारायण शुक्ला (उन्नाव) को डॉ. ओमप्रकाश अवस्थी सम्मान, शब्दाक्षर के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह (कोलकाता) को प्रो. हरेंद्र बहादुर सिंह स्मृति सम्मान तथा मुकेश बहादुर सिंह चौहान को सुरेश नारायण सिंह ‘बच्चा बाबू’ स्मृति सम्मान से अलंकृत किया गया। सभी सम्मानित विभूतियों को अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति-पत्र भेंट कर तथा सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। बैसवारा की धरती ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज की आत्मा, संस्कृति की धड़कन और आने वाली पीढ़ियों की वैचारिक विरासत है। यदि 2026 में प्रस्तावित बैसवारा महोत्सव अपने घोषित स्वरूप में साकार होता है, तो यह न केवल रायबरेली, उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सिद्ध होगी। समारोह में कार्यक्रम के संयोजक, युवा साहित्यकार डॉ. विनय सिंह भदौरिया की पुस्तक ‘सीढ़ियां चढ़ते हुए’ का विमोचन किया गया। इसके बाद आयोजित काव्यांजलि एवं कवि सम्मेलन में कोलकाता के कवि रवि प्रताप सिंह के साथ मध्य प्रदेश के ओज कवि प्रकाश पटेरिया, हाथरस के राणा मुनि प्रताप तथा लखनऊ के धीरज मिश्र सांडिल्य ने अपनी प्रभावशाली काव्य प्रस्तुतियों से प्रदेश मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, सरेनी विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह सहित बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को देर तक मंत्रमुग्ध रखा।

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