कछार के चार चाय बागानों की 1000 बीघा भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप

हजारों श्रमिकों की नागरिक सभा में सीएम विजिलेंस जांच और बेदखली की उठी जोरदार मांग

शिव कुमार, शिलचर, 12 जुलाई: काछार जिले के शिलकुड़ी बरम बाबा स्थित जगन्नाथ सभागार में रविवार को शिलकुड़ी चाय बागान आदिवासी भूमि सुरक्षा कमेटी के तत्वावधान में एक विशाल नागरिक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में शिलकुड़ी, भोराखाई, धर्मखाल और दुर्गाकोना चाय बागानों के  श्रमिकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, पंचायत सदस्यों तथा बुद्धिजीवियों ने भाग लेकर चाय बागानों की भूमि पर कथित अवैध कब्जे के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन किया। पूरे सभागार में “चाय बागान की जमीन बचाओ”, “चाय श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करो” जैसे नारों के बीच सभा का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत सभी आमंत्रित अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान के साथ हुई। पारंपरिक अंगवस्त्र पहनाकर अतिथियों का अभिनंदन किया गया। इसके बाद समिति के पदाधिकारियों ने नागरिक सभा बुलाने के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला और चाय बागानों की वर्तमान स्थिति से लोगों को अवगत कराया। संजीव राय ने कहा, अब चुप रहने का समय नहीं, वे बोले, “चाय श्रमिकों की जमीन बचाने की लड़ाई किसी एक बागान की नहीं, पूरे बराक घाटी के श्रमिकों के अस्तित्व की लड़ाई है”

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ श्रमिक नेता संजीव राय ने कहा कि चाय बागानों की जमीन केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह हजारों श्रमिक परिवारों के जीवन, भविष्य और अस्तित्व का आधार है। यदि आज इस भूमि की रक्षा नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि चारों चाय बागानों के श्रमिकों को किसी भी राजनीतिक या सामाजिक मतभेद से ऊपर उठकर एक मंच पर आना होगा। एक मजबूत और संगठित समिति ही इस लड़ाई को सही दिशा दे सकती है। उन्होंने कहा कि समिति पहले भी जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुकी है और अब मुख्यमंत्री विजिलेंस के माध्यम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की जा रही है।

संजीव राय ने आरोप लगाया कि चाय श्रमिकों की सादगी और सरलता का कुछ लोग फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से चाय श्रमिक जिन जमीनों की रक्षा करते आए हैं, आज उन्हीं जमीनों पर कथित रूप से बाहरी लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार अन्य सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चला सकती है तो चाय बागानों की भूमि को भी अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि चाय श्रमिकों को किसी भी तरह से डरने की जरूरत नहीं है। यदि सभी लोग एकजुट रहेंगे तो उनकी आवाज सरकार तक अवश्य पहुंचेगी और न्याय मिलेगा। सभा के दौरान शिलकुड़ी चाय बागान आदिवासी भूमि सुरक्षा कमेटी के अध्यक्ष सुभाष लाल नुनिया ने विस्तार से समिति की मांगों को रखा। उन्होंने कहा कि शिलकुड़ी चाय बागान के विभिन्न डिवीजनों सहित आसपास के कई क्षेत्रों में बाहरी लोगों द्वारा कथित रूप से बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 1000 बीघा चाय बागान की भूमि पर अवैध कब्जा हो चुका है। कुछ स्थानों पर पिछले दो से तीन वर्षों में अतिक्रमण हुआ है, जबकि कई जगहों पर यह समस्या वर्षों पुरानी है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में और अधिक भूमि पर कब्जा होने की आशंका है। सुभाष नुनिया ने बताया कि नागरिक सभा में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें सबसे प्रमुख मांग मुख्यमंत्री विजिलेंस से पूरे मामले की जांच कराने की है। समिति ने मांग की कि कथित अवैध कब्जे की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए तथा कब्जे वाली भूमि को मुक्त कर चाय बागान प्रबंधन और श्रमिकों के हित में वापस सौंपा जाए।

उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ आंदोलन नहीं है बल्कि चाय श्रमिकों के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा का आंदोलन है। समिति के अध्यक्ष ने बताया कि बराक चाय श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष एवं सांसद कृपानाथ मल्लाह को कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। हालांकि कछार में पूर्व निर्धारित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में व्यस्त रहने के कारण वे नागरिक सभा में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने समिति को अपना समर्थन देने का संदेश भेजा है और भविष्य में इस मुद्दे पर सहयोग का भरोसा भी दिलाया है।

सभा की सबसे बड़ी विशेषता चारों चाय बागानों के श्रमिकों की अभूतपूर्व एकजुटता रही। शिलकुड़ी, भोराखाई, धर्मखाल और दुर्गाकोना चाय बागानों से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रमिक नागरिक सभा में पहुंचे। कई वक्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी बागानों के श्रमिक एक मंच से अपनी आवाज बुलंद करें।

नागरिक सभा में सर्वसम्मति से निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गए:

* मुख्यमंत्री विजिलेंस से पूरे मामले की तत्काल जांच कराई जाए। *कथित अवैध कब्जे वाली भूमि को शीघ्र मुक्त कराया जाए। *भविष्य में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। *चाय श्रमिकों के भूमि अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। *दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संजीव राय के अलावा मोतीलाल नुनिया, जिला परिषद सदस्य सरस्वती रविदास, समिति के अध्यक्ष सुभाष लाल नुनिया, कोऑपरेटिव चेयरमैन प्रदीप नुनिया, बागान महिला श्रमिक पंचायत की बसंती नुनिया, जोलहा समाज के सचिव हकीम उद्दीन, अब्दुल मन्नान, विभिन्न चाय बागानों के श्रमिक पंचायत प्रतिनिधि एवं अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के संपादक शंकु माला, साधारण सचिव राजेंद्र नुनिया, सुजीत नुनिया, सुनील महतो, कामाख्या तिवारी, सूरजनाथ ग्वाला, रोशन लाल गौड़, जगदीश ग्वाला, अमृत तांती, रफीक खान, मेवालाल नुनिया, दिलीप कुमार नुनिया, अंशुमान पाठक, उत्तम श्रीवास्तव, अलकाश हुसैन सहित समिति के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभा के अंत में उपस्थित हजारों श्रमिकों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि यदि चाय बागानों की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो समिति लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना आंदोलन और तेज करेगी। वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि चाय श्रमिकों की पहचान, सम्मान, रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। इसी उद्देश्य के साथ नागरिक सभा का समापन हुआ।

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