नई दिल्ली, 11 जुलाई। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को नई दिल्ली स्थित बार काउंसिल ऑफ इंडिया परिसर में “क्षेत्रीय भाषाओं के समावेशन के माध्यम से विधि शिक्षा को सशक्त बनाने” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
सम्मेलन में सशस्त्र बल अधिकरण के अध्यक्ष एवं बीसीआई की विधि शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के सह-अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन, राज्यसभा सांसद एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा, विधि कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि सहित न्यायपालिका, केंद्र सरकार, देश के प्रमुख विधि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ अधिवक्ता तथा विधि शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में विधि शिक्षा को बढ़ावा देने और न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 10 वर्षीय दृष्टि आधारित कार्ययोजना तैयार करना था। इस दौरान बहुभाषी विधि शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए चरणबद्ध, व्यवस्थित, मापनीय एवं गुणवत्ता-आधारित रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की गई।
विचार-विमर्श में इस बात पर सहमति बनी कि अंग्रेज़ी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में बनाए रखते हुए भारतीय भाषाओं को विधि शिक्षा में क्रमिक रूप से शामिल किया जाए। इसके लिए द्विभाषी और आगे चलकर बहुभाषी विधि शिक्षा मॉडल विकसित किया जाएगा, जिससे कानून की बेहतर समझ विकसित हो, न्याय तक आम लोगों की पहुंच आसान बने, विधिक सहायता एवं क्लिनिकल लीगल एजुकेशन को मजबूती मिले तथा भावी विधि स्नातक जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
सम्मेलन में विधि शिक्षा में भारतीय भाषाओं के समावेशन को गति देने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित अनुवाद उपकरण, डिजिटल विधिक भंडार, मानकीकृत विधिक शब्दावली तथा तकनीकी डेटाबेस के उपयोग पर भी जोर दिया गया। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि इन तकनीकों से तैयार सामग्री का कानूनी एवं भाषायी विशेषज्ञों द्वारा कठोर परीक्षण और सत्यापन किया जाना आवश्यक होगा, ताकि उसकी शुद्धता और विश्वसनीयता बनी रहे।
सम्मेलन में भविष्य की कार्ययोजना के तहत भारतीय भाषाओं में विधि शिक्षा पर राष्ट्रीय घोषणा-पत्र तैयार करने, 10 वर्षीय कार्ययोजना को अंतिम रूप देने तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन, मार्गदर्शन और निगरानी के लिए विधि कार्य विभाग एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के संयुक्त नेतृत्व में राष्ट्रीय संचालन समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।
सम्मेलन के अंत में सभी प्रतिभागियों ने भारतीय भाषाओं के समावेशन के माध्यम से समावेशी, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली विधि शिक्षा को बढ़ावा देने तथा ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य के अनुरूप सभी नागरिकों के लिए न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।