‘फर्जी दस्तावेजों के सहारे हो रहा अतिक्रमण, चाय श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा कर भूमि कराई जाए मुक्त’, आदिवासी भूमि सुरक्षा समिति की मांग
शिव कुमार शिलचर 30 जून: कछार जिले के नवनियुक्त जिला उपायुक्त (डीसी) को मंगलवार को शिलकुड़ी चाय बागान आदिवासी भूमि सुरक्षा समिति ने एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर शिलकुड़ी, भोराखाई, धरमखाल और दुर्गाकोना चाय बागानों की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का गंभीर मामला उठाया। समिति ने आरोप लगाया कि वर्षों से बाहरी लोगों द्वारा चाय बागानों की बड़ी मात्रा में भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। इससे न केवल चाय बागानों की संपत्ति प्रभावित हो रही है, बल्कि पीढ़ियों से बागानों में काम कर रहे आदिवासी श्रमिक परिवारों के अधिकार और भविष्य भी संकट में पड़ गए हैं।
ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में संजीव राय ने कहा कि नए जिला उपायुक्त को पूरे मामले की विस्तार से जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि शिलकुड़ी चाय बागान के अधीन आने वाले भोराखाई, धरमखाल और दुर्गाकोना क्षेत्रों में लंबे समय से कथित रूप से बाहरी लोगों ने चाय बागान की भूमि पर कब्जा कर रखा है। उनका दावा है कि करीब 1,000 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है, जबकि यह भूमि चाय बागान और वहां वर्षों से कार्यरत आदिवासी श्रमिक परिवारों की आजीविका से जुड़ी हुई है।
संजीव राय ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर चाय बागान की भूमि को अपनी निजी संपत्ति के रूप में दर्ज कराने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में चाय बागानों का अस्तित्व और हजारों श्रमिक परिवारों के अधिकार गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि चाय बागान केवल रोजगार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि हजारों श्रमिक परिवारों की पहचान, संस्कृति और जीवन का आधार हैं। कई पीढ़ियों से आदिवासी समुदाय इन बागानों में कार्य करता आया है। ऐसे में बागान की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा सीधे-सीधे श्रमिकों के हितों पर चोट है।
समिति ने प्रशासन से मांग की है कि सभी भूमि अभिलेखों और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा किया है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करते हुए तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए। साथ ही चाय बागानों की भूमि की सीमाओं का पुनः सर्वे कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवाद उत्पन्न न हों।
संजीव राय ने बताया कि जिला उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक जांच और विधिसम्मत कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन स्तर पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो समिति असम के मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले को राज्य सरकार के समक्ष रखेगी तथा चाय बागानों की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग करेगी।
समिति के सचिव राजेंद्र नूनिया ने कहा कि शिलकुड़ी, भोराखाई, धरमखाल और दुर्गाकोना चाय बागानों के लोगों के सहयोग से यह ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि इन बागानों में रहने वाले अधिकांश परिवार कई पीढ़ियों से चाय उद्योग से जुड़े हुए हैं, लेकिन आज उनकी भूमि और अधिकार असुरक्षित होते जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले लगभग 2,3 वर्षों से बाहरी लोग कथित रूप से डुप्लीकेट दस्तावेजों के आधार पर चाय बागान की भूमि पर कब्जा जमाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए और जिन लोगों ने गलत तरीके से सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने का प्रयास किया है, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजेंद्र नूनिया ने कहा कि चाय बागान की भूमि की सुरक्षा केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि हजारों श्रमिक परिवारों के रोजगार, आवास, सामाजिक सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का प्रश्न है। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं रोका गया तो इसका सीधा असर चाय उद्योग और श्रमिक समुदाय दोनों पर पड़ेगा।
समिति ने यह भी बताया कि इस विषय पर चाय बागान प्रबंधन से बातचीत की गई है और प्रबंधन ने भी आवश्यक सहयोग का भरोसा दिया है। समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि चाय बागानों की भूमि पर विशेष अभियान चलाकर सभी विवादित मामलों की जांच कराई जाए और जहां भी अवैध कब्जा पाया जाए, वहां तत्काल बेदखली की कार्रवाई कर भूमि को चाय बागान के अधिकार में वापस सौंपा जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति के अध्यक्ष सुभाष नूनिया, सचिव राजेंद्र नूनिया, संजीव राय, मनोज कुमार जायसवाल, सूरजनाथ ग्वाला, जगदीश ग्वाला, सकूं माला, अमृत तांती, प्रदीप कुमार नूनिया, कामाख्या तिवारी, दिलीप कहार, अनंत लाल बनिया, चंदन बनिया सहित बड़ी संख्या में समिति के सदस्य उपस्थित रहे।