छोटा दूधपातिल की ‘आरण्यिक वैली’ बनी पर्यावरण शिक्षा का केंद्र, 12 वर्षों में 4–5 हजार विद्यार्थियों ने किया इंटर्नशिप

शिलचर, 29 जून। कछार जिले के छोटा दूधपातिल के श्रीनगर स्थित आरण्यिक वैली पिछले 12 वर्षों से पर्यावरण शिक्षा और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यहां नियमित रूप से असम विश्वविद्यालय, गुरुचरण विश्वविद्यालय तथा विभिन्न महाविद्यालयों के पर्यावरण विज्ञान के विद्यार्थियों को इंटर्नशिप का अवसर प्रदान किया जाता है।

संस्था के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में लगभग 4,000 से 5,000 विद्यार्थियों ने यहां इंटर्नशिप के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय वनस्पतियों की पहचान, पारिस्थितिकीय (इकोलॉजिकल) फील्ड सर्वे, प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन, सतत कृषि तथा पर्यावरण जागरूकता जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

कृषि वैज्ञानिक सेबुल अहमद चौधुरी ने बताया कि आरण्यिक वैली स्थानीय वनस्पतियों और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि संस्था समुदाय आधारित संरक्षण गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने इस पहल की सफलता का श्रेय सहयोगी रुकन खान, अमृतेश्वर चंद तथा करुणा कांति दास सहित पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों को दिया। उनके अनुसार, भविष्य में भी विद्यार्थियों के लिए प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण अध्ययन से जुड़े ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से जारी रहेंगे।

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