विश्व पर्यावरण दिवस पर विज्ञान आधारित जागरूकता कार्यक्रम, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित

विश्व पर्यावरण दिवस पर विज्ञान आधारित जागरूकता कार्यक्रम, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित

शिलचर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां पूरे विश्व के साथ-साथ कछार जिले में भी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, वहीं बराक घाटी की भौगोलिक परिस्थितियों और हालिया बाढ़ की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए शिलचर की अग्रणी सामाजिक एवं विज्ञान-आधारित संस्था साइंस ट्रायल ऑर्गनाइजेशन ने इस दिवस को एक अलग और अत्यंत प्रासंगिक स्वरूप में मनाया।

संस्था के तत्वावधान में तथा पीएम श्री सातकराकांदी हाईस्कूल के सक्रिय सहयोग से शुक्रवार को सातकराकांदी में दिनभर विभिन्न जागरूकता एवं रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए आयोजित विशेष कार्यशाला रही, जिसका विषय था “बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में बिना पकाए जाने वाले खाद्य पदार्थों का संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन”

कार्यशाला में बताया गया कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, जब भोजन पकाने की सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तब सूखे एवं बिना पकाए जाने वाले खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखा जा सकता है तथा आपातकालीन परिस्थितियों में स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए किन उपायों को अपनाना चाहिए। इस महत्वपूर्ण सत्र का संचालन साइंस ट्रायल ऑर्गनाइजेशन के पूर्व महासचिव एवं प्रशिक्षक अनिल पाल तथा एनसीएससी कछार जिला कार्यकारी अध्यक्ष राजीव हुसैन चौधरी ने किया।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पर्यावरण विषयक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता के उपरांत पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की महत्ता को रेखांकित करते हुए विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य अहमद हुसैन बरलस्कर ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि केवल वृक्षारोपण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय संकट और प्राकृतिक आपदाओं के समय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर स्वयं को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज की कार्यशाला ने इस दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया है।

इस अवसर पर पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन और मानव समाज की जिम्मेदारियों पर विशिष्ट वक्ता ऋषिकेश दे ने भी विचारोत्तेजक एवं जानकारीपूर्ण वक्तव्य प्रस्तुत किया।

विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संस्था के प्रचार सचिव चंपक साहा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि भविष्य में भी समाजोपयोगी एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रम जारी रहेंगे।

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