शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का संकल्प सिद्धि को प्राप्त हो रहा है – स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज
शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ एक दुर्लभ एवं अकल्पनीय महाप्रयोग – प्रो. छोटेलाल त्रिपाठी
काशी/जम्मू – आज पावन पवित्र पुरुषोत्तम मास में विगत माह 8 मार्च 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक ब्रह्मातीर्थ, पुष्कर, राजस्थान में आयोजित शत 100 गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ को निर्विघ्नता पूर्वक संपन्न करवाने के पश्चात परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज के काशी आगमन पर श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद (संस्थापित श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट- न्यास) के गणमान्य विद्वानों द्वारा भव्य दिव्य अभिनंदन पत्र एवं अंग वस्त्र से प्रदान करके वंदन किया गया।
अभिनन्दन कार्यक्रम को वैदिक मंगलाचरण से आरम्भ किया गया। इस अवसर पर शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ के विषय में विस्तार से जानकारी देते हुए श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के मुख्य न्यासी व मन्दिर एवं गुरुकुल सेवा योजना प्रमुख जम्मू कश्मीर प्रान्त डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने बताया है कि इस महायज्ञ के संकल्प से सनातन धर्म, संस्कृति एवं परम्परा को संरक्षण करने में अधिक बल मिलेगा। खास करके उन विप्रों में जागृति आई है जो संध्या गायत्री से विमुख हो चुके थे। इस महायज्ञ से न केवल समस्त विश्व में सनातन धर्म के प्रति समर्पण एवं उससे होने वाले परिवर्तन को स्वीकार्यता बढ़ने वाली है। यह महायज्ञ वास्तव में एक दिव्य अलौकिक महाप्रयोग ही है जिसे एक तपस्वी सन्त ने संकल्प से सिद्धि तक पहुंचाया।
इस अवसर पर सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के मीमांसा विभाग के निवर्तमान अध्यक्ष एवं श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद के कार्यकारी अध्यक्ष तथा महायज्ञ के यजमान प्रो. कमलाकान्त त्रिपाठी जी ने अपने मुखारबिंद से यज्ञ की दिव्य अनुभूति एवं चमत्कारों को भी सभी से साझा किया और बताया कि हमने अपने जीवन में बहुत से यज्ञ देखे है लेकिन ऐसा अलौकिक, अकल्पनीय शत गायत्री पुरश्चरण महाप्रयोग जो पूर्ण रूप से शास्त्रीय विधिविधान से सपन्न हुआ हो ऐसा नहीं देखा था।
उसी क्रम में परिषद के अध्यक्ष प्रो. छोटेलाल त्रिपाठी ने बताया कि समाज में यज्ञ करने वाले बाबाओं की कमी नहीं है लेकिन सभी यज्ञ को व्यापार रूप में करने लगे हैं, लेकिन प्रखर जी महाराज आज भी अपनी गुरु परम्परा का रक्षण करते हुए सनातन धर्म एवं वैदिक परम्परा के अंतर्गत विश्व कल्याण हेतु ऐसे दुर्लभ प्रयोग करके समाज का उपकार किया है। इन्हीं सभी महत्त्वपूर्ण शास्त्रीय तथ्यों पर विचार विमर्श करके हमारी परिषद ने उन्हें सम्मान पत्र एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया है।
कार्यक्रम में अपना वक्तव्य देते हुए महामंडलेश्वर यज्ञसम्राट स्वामी श्रीप्रखर जी महाराज ने बताया कि हमारे याज्ञिक महाप्रयोग में से यह अभी तक का अद्भुत अलौकिक अकल्पनीय महाप्रयोग था जो पूर्ण रूप से शास्त्रीय विधिविधान से सपन्न हुआ। यज्ञ में कुल 27 करोड़ गायत्री मंत्रों का जप एवं हवन त्रिकालिक संध्यानिष्ठ ब्राह्मणों एवं यजमानों के सहयोग से सम्पन्न हुआ। इस महायज्ञ की एक और विशेषता यह भी थी कि आज तक सभी यज्ञों में हमारे धनाढ्य शिष्यों द्वारा धन का सहयोग प्राप्त होता रहा लेकिन यह महायज्ञ केवल ब्राह्मणों के सहयोग से संपन्न होना था और विश्वभर के ब्राह्मणों ने इसमें पूरे तन, मन एवं धन से सहयोग भी किया। समस्त विश्व में सनातन धर्म की स्थापना, शान्ति एवं वैश्विकस्तर पर आतंकवाद से मुक्ति दिलाने हेतु अनुष्ठित यह महायज्ञ की परिकल्पना महर्षि विश्वामित्र जी के द्वारा पूर्व में शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ के दृष्टांत को ध्यान करके काशी विद्वानों एवं शास्त्रोक्त दृष्टि से सुनिश्चित करके भगवती की कृपा से सम्पन्न कराया गया।
इस महायज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर बहुत बड़े स्तर पर देश एवं विश्व में परिवर्तन भी आप सभी देख रहे हैं। दृष्टांत के रूप में पश्चिम बंगाल के चुनाव का परिणाम, हार्मोज पर भारत के तेल एवं गैस के जहाज का बिना रोक टोक के आवागमन आदि बहुत से उदाहरण देखने को मिल रहा हैं। इस महायज्ञ के माध्यम से विश्वस्तर पर निरंतर परिवर्तन के लिए ब्राह्मणों की शक्ति का मूल साधन संध्या एवं गायत्री के प्रति निष्ठा एवं नियम को भी बढ़ावा दिया गया।
अपने वक्तव्य के क्रम में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के वेदान्त विभाग के विभागाध्यक्ष एवं श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के न्यासी प्रो. सुधाकर मिश्र ने बताया कि यज्ञ के इतिहास में एक और आश्चर्य देखने को मिला कि श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास द्वारा संचालित सनातन वैदिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि उत्थान समिति द्वारा इस महायज्ञ को विश्व रिकॉर्ड दर्ज करवाने के लिए एक प्रयास किया गया जिसके परिणाम स्वरूप 12 विश्व रिकॉर्ड प्राप्त भी हुए जो बहुत ही गौरव का विषय है।
इस अवसर परिषद के प्रवक्ता डॉ. विजय कुमार शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किया। परिषद के मंत्री आचार्य उमंग नाथ शर्मा ने भविष्य में होने वाले इस प्रकार के याज्ञिक प्रयोग में बढ़ चढकर के हिस्सा लेने के लिए बोला। संगठन मंत्री डॉ. संजय त्रिपाठी ने आगे से और अधिक प्रयास के लिए धन्यवाद दिया। इसी क्रम में कोषाध्यक्ष डॉ. आशीषमणि त्रिपाठी से उपस्थित सभी सम्मानित विद्वानों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
अन्त में महाराज जी की शिष्या माता चिदानन्दमयी ने आगंतुक सभी सम्मानित विद्वानों का सम्मान किया। इस अवसर पर पंडित राम प्रिय पाण्डेय, पंडित नरेन्द्र शर्मा जी, आचार्य बृजेश मणि दीक्षित, अभिषेक पाण्डेय, हर्षित शर्मा, डॉ. विश्वेश्वर देव प्रसाद मिश्र सहित गणमान्य विद्वान उपस्थित रहें।