असम विधानसभा में महिला आरक्षण बिल पर गरमाई बहस, विधायक राजदीप ग्वाला ने किया समर्थन
विशेष प्रतिनिधि गुवाहाटी, 26 मई। असम विधानसभा के प्रथम सत्र के चौथे दिन महिला आरक्षण बिल को लेकर सदन में जोरदार बहस देखने को मिली। उधारबंद के विधायक राजदीप ग्वाला ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है— “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” अर्थात जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी समाज, राज्य और देश की उन्नति महिलाओं के सम्मान और विकास पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि असम सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है और आज असम के चाय बागान महिलाओं की मेहनत से ही जीवित हैं।
राजदीप ग्वाला ने उधारबंद विधानसभा क्षेत्र के मुस्लिम समाज द्वारा गौ माता की कुर्बानी बंद करने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक सौहार्द का सकारात्मक उदाहरण बताया। साथ ही उन्होंने डिलिमिटेशन को लेकर विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को भी महिला आरक्षण बिल का समर्थन करना चाहिए।
महिला आरक्षण बिल के समर्थन में असम सरकार की कैबिनेट मंत्री अजंता नियोग ने सदन में प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष के कुल 29 विधायकों ने अपने विचार रखे।
विधानसभा में उस समय हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई जब विधायक भुवन पेगू के वक्तव्य पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और सदन से वॉकआउट कर दिया। दलगांव के विधायक मुजीबुर्रहमान ने मुख्यमंत्री से विपक्षी विधायकों के प्रति सकारात्मक रवैया बनाए रखने की अपील की। वहीं सोनाई के विधायक अमीनुल हक लश्कर ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि सरकार को पहले महिला आरक्षण का पूरा रोडमैप सार्वजनिक करना चाहिए।
विपक्षी विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण तत्काल प्रभाव से दिया जाना चाहिए और इसे डिलिमिटेशन से जोड़ना उचित नहीं है। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस विधायकों के साथ सदन से वॉकआउट किया।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने कांग्रेस के वॉकआउट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “आप लोग बाहर विश्राम कीजिए, हम सदन चला लेंगे।” उन्होंने कांग्रेस को महिला विरोधी बताते हुए कहा कि यदि कांग्रेस चाहती तो महिला आरक्षण बहुत पहले लागू हो चुका होता। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से अखिल गोगोई द्वारा सदन में हंगामे की जांच कराने की भी मांग