चंद्रनाथ रथ हत्याकांड : सुपारी, असलहा तस्करी और गैंग नेटवर्क का पूरा विश्लेषण

चंद्रनाथ रथ हत्याकांड : सुपारी, असलहा तस्करी और गैंग नेटवर्क का पूरा विश्लेषण
गाजीपुर/बलिया/अम्बिकापुर/कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार से जुड़े चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के अपराध जगत के खतरनाक गठजोड़ को उजागर कर दिया है। इस मामले में गिरफ्तार गाजीपुर के जमानियां क्षेत्र निवासी विनय राय और फरार चल रहे बलिया के कुख्यात शूटर ज्ञानेन्द्र उर्फ मन्नू उर्फ अभिषेक उर्फ मामू सिंह के तार कई राज्यों में फैले संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़ते नजर आ रहे हैं। सीबीआई और एसटीएफ की जांच में लगातार ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जो इस हत्याकांड को केवल एक सुपारी किलिंग नहीं बल्कि हथियार तस्करी, गैंग गठजोड़ और पेशेवर अपराध सिंडिकेट का हिस्सा बताते हैं।
अम्बिकापुर में हुई थी विनय और मामू की पहली मुलाकात
सूत्रों के अनुसार गाजीपुर के देवरिया गांव निवासी विनय राय अपराध की दुनिया में तेजी से पैसा कमाने के उद्देश्य से असलहा तस्करी में उतरा। इसी दौरान गांव के दो यादव बंधुओं पर फायरिंग की घटना के बाद वह छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर फरार हो गया। वहीं उसकी मुलाकात बलिया निवासी कुख्यात शूटर ज्ञानेन्द्र उर्फ मामू सिंह से हुई।
बताया जाता है कि यही मुलाकात आगे चलकर बड़े अपराध नेटवर्क की नींव बनी। दोनों ने मिलकर हथियार सप्लाई, सुपारी किलिंग और अंतरराज्यीय अपराध गतिविधियों का संगठित तंत्र खड़ा किया। पश्चिम बंगाल के अपराधियों से भी इनके संपर्क विकसित हुए और धीरे-धीरे इनका नेटवर्क कई राज्यों तक फैल गया।
सुपारी लेकर करते थे हत्या, साथ-साथ चलाते थे गैंग
जांच एजेंसियों के मुताबिक विनय राय और ज्ञानेन्द्र सिंह ने अपने-अपने अलग गिरोह बना लिये थे, लेकिन दोनों गैंग कई मामलों में संयुक्त रूप से काम करते थे। विशेषकर सुपारी लेकर हत्या करना और अवैध हथियारों की सप्लाई इनकी मुख्य गतिविधियां थीं।
सूत्र बताते हैं कि चंद्रनाथ रथ की हत्या की सुपारी भी इसी नेटवर्क ने ली थी। हत्या की साजिश के दौरान कई बार ज्ञानेन्द्र सिंह गाजीपुर के देवरिया गांव स्थित विनय राय के घर रात के अंधेरे में आता-जाता रहा। स्थानीय स्तर पर इसकी भनक तक नहीं लगती थी।
मुंबई से लौटने के बाद बदल गया ज्ञानेन्द्र का जीवन
बलिया के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र अंतर्गत शीतल दवनी गांव निवासी ज्ञानेन्द्र सिंह का शुरुआती जीवन सामान्य था। उसके पिता किसान और जनसंघ-आरएसएस विचारधारा से जुड़े बताए जाते हैं। कम उम्र में वह मुंबई चला गया था। लगभग दस वर्ष बाद जब वह गांव लौटा तो लोगों के बीच चर्चा थी कि वह किसी आपराधिक मामले में फंस चुका है।
मुंबई से लौटने के बाद उसने दोबारा वहां का रुख नहीं किया और वाराणसी के कैथी गांव में रिश्तेदारों के यहां रहने लगा। इसी दौरान उसका संपर्क वाराणसी के कुख्यात सन्नी सिंह गैंग से हुआ। पुलिस सूत्रों के अनुसार वह गैंग के साथ रहकर कई आपराधिक वारदातों में शामिल रहा। बाद में सन्नी सिंह का एनकाउंटर हो गया, लेकिन तब तक ज्ञानेन्द्र अपराध जगत में अपनी अलग पहचान बना चुका था।
अम्बिकापुर में बनाई मजबूत पैठ
कैथी निवासी एक व्यवसायी के संपर्क में आने के बाद ज्ञानेन्द्र सिंह छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर पहुंचा। वहीं उसने स्थानीय अपराध जगत में अपनी पकड़ मजबूत की। जांच एजेंसियों के अनुसार वह कई हत्या मामलों में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से शामिल रहा। चर्चित कारोबारी गोवर्धन अग्रवाल हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया था।
इसके बाद उसका संपर्क गाजीपुर के एक चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी से हुआ, जो मुख्तार अंसारी गिरोह के करीबी माने जाते रहे हैं। फरारी के दौरान ज्ञानेन्द्र उनके साथ भी रहा। बाद में कोर्ट में सरेंडर करने के बाद उसकी जमानत कराई गई और उसे बॉडीगार्ड के रूप में रखा गया।
2022 में दिनदहाड़े बरसाईं थीं 30 राउंड गोलियां
ज्ञानेन्द्र उर्फ मामू सिंह का सबसे खौफनाक चेहरा वर्ष 2022 में सामने आया था। आरोप है कि गांव के ही निवासी मुकेश सिंह द्वारा घर के बगल की जमीन खरीदकर बाउंड्रीवाल बनवाने को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद ज्ञानेन्द्र अपने साथियों के साथ पहुंचा और दिनदहाड़े करीब 30 राउंड फायरिंग कर दी।
घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसमें उसका उग्र रूप दिखाई दिया। इस मामले में बांसडीह रोड थाने में उसके खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा में मुकदमा दर्ज है। घटना के बाद से इलाके में उसका आतंक और बढ़ गया था।
तकनीक से बचने के लिए अपनाता है पुराना तरीका
अपराध जगत से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ज्ञानेन्द्र सिंह बेहद शातिर और तकनीकी रूप से सतर्क अपराधी माना जाता है। पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए वह आज भी स्मार्टफोन के बजाय की-पैड मोबाइल का इस्तेमाल करता है। वह अपने नाम से सिम कार्ड नहीं लेता और वारदात के बाद मोबाइल तथा सिम दोनों नष्ट कर देता है।
बताया जाता है कि वह लगातार अपना ठिकाना बदलता रहता है और अपने गैंग के सदस्यों को भी अपने वास्तविक लोकेशन की जानकारी नहीं देता। इसी वजह से सीबीआई और एसटीएफ को उसकी तलाश में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल
इस हत्याकांड में अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चंद्रनाथ रथ की हत्या की सुपारी किसने दी और इसके पीछे वास्तविक मास्टरमाइंड कौन है। जांच का फोकस अब उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के अपराध नेटवर्क के साथ-साथ राजनीतिक और कारोबारी कनेक्शन पर भी केंद्रित हो गया है।
सीबीआई, एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त जांच में आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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