साई विकास विद्या निकेतन में पहली बार एयर शो का आयोजन, विद्यार्थियों में विज्ञान और तकनीक के प्रति बढ़ा उत्साह
शिलचर के सोनाई रोड स्थित Sai Vikash Vidya Niketan के विशाल खेल मैदान में हाल ही में विद्यालय के इतिहास में पहली बार भव्य एयर शो का आयोजन किया गया। इस अनूठे कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भारी उत्साह और आकर्षण पैदा किया।
विद्यालय के अकादमिक डायरेक्टर डॉ. पी. श्रीनिवास रेड्डी की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच विज्ञान, तकनीक और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करना तथा तकनीकी जागरूकता को बढ़ावा देना था।
एयर शो के दौरान आकाश में मॉडल विमानों की रोमांचक उड़ान, रोबोटिक्स प्रदर्शन और विभिन्न तकनीक-आधारित गतिविधियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए एयरोस्पेस और तकनीकी विशेषज्ञों ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सीधे संवाद के माध्यम से प्रदान कीं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य अरिवुक्करासु पांडियन एवं उप-प्रधानाचार्या प्रीथा के.एच. ने कार्यक्रम में उपस्थित रहकर विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया। वहीं विद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी भी विद्यार्थियों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे और उन्हें प्रोत्साहित करते नजर आए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विज्ञान और तकनीक को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। मॉडल विमानों की उड़ान और रोबोटिक्स प्रदर्शन को देखकर छात्र-छात्राएं लगातार प्रश्न पूछते और अपनी जिज्ञासा व्यक्त करते रहे। बड़ी संख्या में उपस्थित अभिभावकों ने भी कार्यक्रम का आनंद लिया और आयोजन से संतोष व्यक्त किया।
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि शिलचर में इस प्रकार का एयर शो आयोजित करने वाला साई विकास विद्या निकेतन पहला विद्यालय बना है। भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऐसे शिक्षणमूलक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विद्यालय की सहायक शिक्षिका आराधना भट्टाचार्य ने कहा, “इस तरह की पहल विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करती है। रोबोटिक्स, एयरोस्पेस और आधुनिक तकनीकों के प्रति उनकी रुचि बढ़ाने तथा नए अवसरों से परिचित कराने में ऐसे कार्यक्रम अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। हमारा लक्ष्य विद्यार्थियों को भविष्य के युवा वैज्ञानिकों के रूप में तैयार करना है।”