यूजीसी ने एलबीएस संस्कृत विवि को कैटेगरी-वन का दर्जा प्रदान किया

यूजीसी ने एलबीएस संस्कृत विवि को कैटेगरी-वन का दर्जा प्रदान किया

अप्रैल 2020 में भारत सरकार ने तीन संस्कृत विश्वविद्यालयों को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया था, जिसमें दिल्ली के क़ुतुब सांस्थानिक क्षेत्र में 2062 में स्थापित श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को भी मानित विश्वविद्यालय से केन्द्रीय विश्वविद्यालय के रूप में प्रोन्नत किया गया था। यहाँ विश्वविद्यालय प्रत्येक क्रियाकलापों में अग्रणी स्थान प्राप्त करते हुए यूजीसी एवं शिक्षा मन्त्रालय भारत सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है। मई में नैक मूल्यांकन में ए डबल प्लस प्राप्त करते हुए केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में शीर्षतम स्थान प्राप्त किया तथा अब यूजीसी ने इस विश्वविद्यालय को उच्चतम मानक का दर्जा प्रदान करते हुए प्रथम श्रेणी में स्थान प्रदान किया है। यह विश्वविद्यालय के बहुमुखी विकास एवं उच्च शैक्षणिक मानकों के अनुरूप स्वायत्तता स्थापित करते हुए विविध सोपानों पर स्वतन्त्रतापूर्वक निर्णय लेने में सहायक होगा। इस उपलब्धि के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों, संस्थानों तथा शिक्षाविदों से शुभकामना संदेश प्राप्त हो रहे हैं।

बताते चलें कि यह विश्वविद्यालय पारम्परिक एवं आधुनिक प्रणालियों का प्रयोग करते हुए छात्रों को संस्कृत के साथ साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भी सक्षम बनाता है। यहाँ विश्वविद्यालय संस्कृत के वेद, व्याकरण, ज्योतिष, वास्तु, अद्वैत, न्याय, मीमांसा आदि 22 परम्परागत विभागों का संचालन करते हुए कम्प्यूटर, समाजशास्त्र, राजनीति, हिन्दी, पर्यावरण आदि विषयों का तथा बीएड एमएड जैसे प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों का भी संचालन करता है। विश्वविद्यालय के कैटेगरी वन में स्थान प्राप्त करने के बाद यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय मानकों का निर्माण करते हुए आवश्यकतानुसार वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय लेने में समर्थ होगा। नये पाठ्यक्रमों को शुरू करने तथा फैकल्टी एवं स्टाफ नियुक्ति में स्वतन्त्र होगा। इस विश्वविद्यालय को अब एनआईआरएफ की रैंकिंग में उच्च स्थान प्राप्त होगा, विदेशी विश्वविद्यालयों और संस्थाओं के साथ MoU और शोध सहयोग में सुविधा प्राप्त होगी। नवीन अनुसन्धान के लिए डीएसटी, डीबीटी, सर्ब, एआईसीटीई, यूजीसी एवं अन्य एजेंसियों से उच्च अनुदान प्राप्त होगा। स्वायत्त पाठ्यक्रम निर्माण करते हुए नए विषय और इंटरडिसिप्लिनरी प्रोग्राम्स शुरू किया जा सकेगा। कक्षा की पद्धति ऑनलाइन और हाइब्रिड मोड पर की जा सकेगी। उच्च शिक्षा में उद्यमिता और इंटर्नशिप कार्यक्रम आयोजित कराये जा सकेंगे। इससे छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों के साथ साझेदारी करते हुए रोजगार प्रदान कराया जा सकेगा।

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