प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाले का आरोप: भोराखाई घुंघुर पंचायत के वास्तविक लाभार्थी वंचित, जियो-टैगिंग में अनियमितता का आरोप

शिलचर | 21 जुलाई –प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत भोराखाई घुंघुर ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 4 में वास्तविक गरीब और बेघर लोगों को योजनाओं से वंचित किए जाने का आरोप सामने आया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि जियो-टैगिंग (Geo-tagging) प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता बरती गई, और कुछ चयनित लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जबकि वे वास्तविक लाभार्थी नहीं हैं।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, पंचायत के एसएसजी (स्वयं सहायता समूह) की जिम्मेदारी लिपिका दास के पास थी। लेकिन उन्होंने जियो-टैगिंग के लिए खुद न आकर मौमिता भट्टाचार्य नामक किसी अन्य व्यक्ति को भेजा। जब पीएम आवास योजना की सूची प्रकाशित हुई, तो लोगों ने पाया कि सूची में उन्हीं लोगों के नाम हैं जो लिपिका दास के समूह से जुड़े हैं — जबकि असली जरूरतमंदों को दरकिनार कर दिया गया।

वार्ड नंबर 4 के बूथ अध्यक्ष बिपुल चंद्र री ने बताया कि उन्होंने स्वयं एसएसजी सदस्यों के साथ मिलकर घर-घर जाकर जियो-टैगिंग के लिए फोटो एकत्र किए थे। बावजूद इसके, सूची से असली गरीब और बेघर लोगों के नाम हटा दिए गए। इससे पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है।

इस कथित अनियमितता को लेकर सोमवार को एक पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बजना देवनाथ, चंद्रारानी देवनाथ, उषा रानी देवनाथ, किरण नुनिया, सुहाग हुसैन, हेना बेगम, कुंती नुनिया, कश्यला नुनिया, अर्पिता नुनिया, पियंगकारी सहित कई स्थानीय लोग उपस्थित थे। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और कहा कि योजना के वास्तविक पात्रों की पुनः जांच कर सूची में सुधार किया जाए।

स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

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