शिलचर, 2 जुलाई: गोलाघाट में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के काफिले पर हमले की घटना के बाद असम की राजनीति गरमा गई है। बुधवार को शिलचर में छात्र संगठन ‘आकसा’ द्वारा आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में संगठन ने असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोरव गोगोई के बराक घाटी में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। संगठन ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक गोगोई सार्वजनिक रूप से इस घटना के लिए माफी नहीं मांगते, तब तक उन्हें बराक घाटी में घुसने नहीं दिया जाएगा।
‘आकसा’ का आरोप है कि असम में लोकतांत्रिक आंदोलन की आड़ में अराजक और आतंकवादी गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने कहा कि विपक्ष शायद यह भूल गया है कि यह कश्मीर नहीं, असम है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद गोरव गोगोई अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने में विफल रहे हैं।
‘आकसा’ के प्रमुख सलाहकार रूपम नंदी पुरकायस्थ ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, “मुख्यमंत्री के काफिले पर बोतलें फेंकना न केवल एक शर्मनाक घटना है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र को कुचलने जैसा है। पूरे राज्य की जनता इस घटना से स्तब्ध है। इस प्रकार की उग्र और हिंसक राजनीति असम की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के नाम पर हिंसा फैलाना और लोकतंत्र का अपमान करना अत्यंत निंदनीय है। ‘आकसा’ ने इस हमले में शामिल सभी हमलावरों को “राष्ट्र का कलंक” करार दिया और मांग की कि दोषियों को शीघ्र चिन्हित कर उन्हें कड़ी और उदाहरणीय सजा दी जाए।
सम्मेलन के दौरान संगठन ने गोरव गोगोई की भूमिका और उनके नेतृत्व को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर वे मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके बराक में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।