लखनऊ में पत्थर और केमिकल से बन रही चाय पत्ती:STF ने फैक्ट्री पर मारा छापा, 11000 किलो माल जब्त; 18 जिलों में सप्लाई

एजेंसी समाचार लखनऊ, 15 जनवरी: लखनऊ में STF और खाद्य सुरक्षा विभाग (FSDA) ने नकली चाय पत्ती बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। यहां केमिकल और सेंडस्टोन (बलुआ पत्थर) मिलाकर चायपत्ती तैयार की जा रही थी। इसे अलग-अलग नाम के रैपर में पैक कर लखनऊ और आसपास के इलाकों में बेचा जा रहा था।
फैक्ट्री मड़ियांव थाना क्षेत्र के फैजुल्लागंज में स्थित फैक्ट्री में से टीम ने 11 हजार किलो नकली चायपत्ती, सिंथेटिक कलर और सेंडस्टोन बरामद किया है। इसकी कीमत 13 लाख रुपए है। अधिकारियों ने चायपत्ती, सिंथेटिक रंग और सेंडस्टोन के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए हैं।
फैक्ट्री से यह सामान हुआ बरामद
11 हजार किलो नकली चायपत्ती।
30 हजार रुपए का सिंथेटिक रंग।
सेंडस्टोन के कई पैकेट।
बिना रजिस्ट्रेशन के तैयार पैकेट।
ऐसे हुआ पूरा खुलासा FSDA के अधिकारी डॉ. विजय प्रताप सिंह ने बताया कि दो महीनों से नकली चायपत्ती की बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं। सोमवार रात STF की मदद से फैजुल्लागंज स्थित तीन मंजिला फैक्ट्री पर छापा मारा। यह फैक्ट्री आरिफ है। कार्रवाई के दौरान आरोपी फरार हो गया।
फैक्ट्री में तैयार नकली चाय की पत्ती के पैकेट।
अधिकारियों को अब तक नहीं लगी भनक इस मामले ने प्रशासन और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब तीन मंजिला गोदाम में इतने बड़े स्तर पर नकली चाय पत्ती का कारोबार हो रहा था, तो इसकी भनक स्थानीय अधिकारियों को क्यों नहीं लगी? क्या यह केवल एक फैक्ट्री तक सीमित मामला है, या फिर नकली खाद्य उत्पादों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?
फैक्ट्री से लगभग 30 हजार रुपए के सिंथेटिक रंग और अन्य खतरनाक पदार्थ जब्त किए हैं।
कैसे खुलेआम बिक रही थी जहरीली चाय? छापेमारी में यह बात सामने आई कि फैक्ट्री में बिना ब्रांड रजिस्ट्रेशन के पैकेट तैयार किए जा रहे थे। सवाल यह उठता है कि बिना GST और बिक्री के दस्तावेज के यह माल बाजार तक कैसे पहुंच रहा था? क्या कुछ डीलर और खुदरा विक्रेता भी इस गोरखधंधे में शामिल हो सकते हैं?
नकली चायपत्ती से कैंसर जैसी बीमारी का खतरा डॉक्टरों का कहना है कि चाय में मिलाए गए रसायन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

Leave a Comment