काढ़ा-कीर्तन व सकारात्मक सोच से कोरोना से जंग जीतकर इंजीनियर के परिवार ने भी एक मिसाल पेश की

गोरखपुर। कोरोना वायरस की दूसरी लहर पहली से कहीं घातक साबित हो रही है। इलाज और इंतजाम नाकाफी साबित हो रहा है। खुद व अपनों को गंवाने के गम से कराह रहे मरीजों-तीमारदारों के हालात के सामने मानवता हर रोज शर्मिंदा हो रही है, लेकिन इस त्रासदी वाले समय में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी कोशिशों से साबित कर रहे है कि मजबूत इरादों व हिम्‍मत के बूते वायरस को हराया जा सकता है। होम आइसोलेशन में काढ़ा-कीर्तन व सकारात्मक सोच से कोरोना से जंग जीतकर बिजली निगम के इंजीनियर के पांच सदस्यीय परिवार ने भी एक मिसाल पेश की है।

इस परिवार के किसी भी सदस्य को आस्पताल जाने की नौबत नहीं आई।

शहर के रामजानकी नगर मोहल्ले में रहने वाले बिजली निगम के इंजीनियर पुनित निगम के परिवार में छह सदस्य हैं। कोरोना संक्रमण की शुरुआत 27 मार्च को इंजीनियर से हुई। इसके बाद एक-एक कर परिवार के अन्य पांच सदस्य संक्रमित होते चले गए। पत्नी व दोनों बच्चों के संक्रमित होने के तीन दिन बाद बुजुर्ग मां भी कोरोना संक्रमण की जद में आ गईं। शुरू-शुरू में इंजीनियर व उनका परिवार डरा हुआ था। खासकर जब मां को कोरोना हुआ तो इंजीनियर ने सोचा कि उनकी शुगर, हार्ट और वीपी की बीमारी कहीं कोई बड़ी दिक्‍कत न खड़ी कर दे लेकिन कुछ समय के सोच-विचार के बाद उन्होंने तय किया कि घर पर ही रहकर ही वायरस का मुकाबला करेंगे। घर में आइसोलेशन के लिए जगह कम होने पर इंजीनियर ने पास के ही एक रिश्तेदार से मदद मांगी। वह एक कमरा देने को तैयार हो गए। इसके बाद परिवार में सलाह-मशविरा हुआ। हर सदस्‍य का एक रूटीन चार्ट बना। डाइट तय हुई। फैसला लिया गया कि इस संकट काल में दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ी जाएगी।

पहला मोर्चा-खुद को फिट एंड फाइन रखने का। इसके लिए सुबह-शाम काढ़ा, व्‍यायाम, योग अभ्‍यास और अन्‍य शारीरिक गतिविधियों का पूरा शेड्यूल बना। दूसरा मोर्चा-मानसिक तौर पर खुद को मजबूत बनाए रखने का। इसके लिए घर के माहौल को खुशनुमा बनाए रखने के साथ-साथ नियमित पूजा-पाठ व कीर्तन-भजन का सिलसिला शुरू हुआ। पूरे परिवार ने दृढ़ इच्‍छाशक्ति के साथ इस रूटीन को अपनाया। नतीजा यह कि परिवार के एक भी सदस्‍य को अस्‍पताल जाने की नौबत नहीं आई। मजबूत इरादों व हिम्‍मत से अब सभी कोरोना संक्रमण मुक्‍त हो चुके हैं।

बहन के घर से मिला सहयोग

ई.पुनीत निगम कहते है कि संकट की घड़ी में पास के मोहल्ले में बहन के घर से काफी सहयोग मिला। उसके घर से सभी के लिए अलग-अलग भोजन का पार्सल समय-समय पर आता रहा। हम सभी वीडियो काल के जरिए एक-दूसरे का हालचाल लेते रहे। पत्नी, बच्चों को लेकर थोड़ी परेशान थी। उसको रोज एहसास दिलाता रहा कि कुछ नहीं होगा, ईश्वर पर भरोसा रखों। छोटा भाई जो कोरोना संक्रमण की जद से दूर था। उसे बहन के घर भेज दिया था ताकि वह बचा रहें। 13 अप्रैल को परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ कोराना संक्रमण की जांच कराई। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। मां व पत्नी दोनों भावुक होकर रोने लगीं। करीब 20 दिन बाद अपनी 4 साल की बिटिया को गोद में उठाया। अब पूरा परिवार पूरी तरह फिट है। कोरोना काल के रूटीन चार्ट का पालन अब भी हो रहा है।

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