चलती है हरदम कवि के कलम।

दुनिया को पन्ने में
           समेटते है।
कभी झुंझलाते है
कभी खुशी में
झूम उठते हैं।
कभी अश्कों से
समंदर भर देते है।
हर किसी के भावों को
   आसानी से समझ जाते है
हर स्थिति में
    चलती है हरदम कवि के कलम।
दर्शन को व्यक्त कर लेते है ,
   राजनीति के इतिहास जानते है।
दो शब्दों में
    दुनिया को पन्ने में उतरते हैं।
संगर्षमय जीवन में भी,
चलती हैं हरदम कवि के कलम।
हाजिरा बेगम चौधरी।
ग्यारहवीं कला।
जवाहर नवोदय विद्यालय,कछार 

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