चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती एक सुप्रसिद्ध भारतीय लेखक, कवि और पत्रकार, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और तमिलनाडु के समाज सुधारक थे। सुब्रमण्यम भारती, एक क्रांतिकारी देशभक्त कवि, तमिलनाडु से उस समय उभरे जब इतिहास को विकृत करके भारत को आर्यों और द्रविड़ों में विभाजित करने के गुप्त प्रयास हो रहे थे। 18वीं सदी की दूसरी तिमाही से भारतीय भाषाओं की विविधता को परस्पर विपरीत और विरोधी भाषाएँ बताकर भारत की राष्ट्रीय एकता को कमज़ोर करने की योजनाएँ बनाई गईं। चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम, एक भारतीय, उन कई युवाओं में सबसे ऊर्जावान थे जिन्होंने स्वामी विवेकानन्द द्वारा प्रज्ज्वलित देशभक्ति की ज्योति जगाई। बालक सुब्रमण्यन ने जैसे ही देवी सरस्वती की उपासना और धरती की सुगंध वाले गीतों के माध्यम से भारत का जागरण गीत गाना शुरू किया, समाज ने उन्हें “भारती” नाम दे दिया। जब उन्होंने इसे लिखा तो वे एक महान कवि बन गये। "महाकवि भारती" के रूप में लोकप्रिय, वे आधुनिक तमिल कविता के अग्रदूत थे और उन्हें अब तक के सबसे महान तमिल साहित्यकारों में से एक माना जाता है। उनकी कई रचनाएं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रवाद को जगाने वाले ज्वलंत गीत थे। 1882 में तिरुनेलवेली जिले (वर्तमान थूथुकुडी) के एट्टायपुरम में जन्मे भारती की प्रारंभिक शिक्षा तिरुनेलवेली और वाराणसी में हुई और उन्होंने कई समाचार पत्रों में पत्रकार के रूप में काम किया। उनमें से 'स्वदेशमित्रन' और 'भारत' उल्लेखनीय समाचार पत्र थे। भारती
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सक्रिय सदस्य भी थे। 1908 में ब्रिटिश भारत सरकार द्वारा भारती के खिलाफ उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, जिसके कारण उन्हें पुडुचेरी जाना पड़ा, जहां वे 1918 तक रहे। भारती द्वारा लिखित साहित्य का दायरा बहुत विस्तृत था जिसमें धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक पहलू शामिल थे। भारती द्वारा लिखे गए गीतों का व्यापक रूप से तमिल फिल्मों और संगीत समारोहों में उपयोग किया जाता है। महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती ने भारतीय भाषाओं ,भारतीय साहित्य और संस्कृति के बीच एकत्व को स्थापित करते हुए सही मायने में भारतीय साहित्य की संकल्पना को मूर्त रूप देने का काम किया है।इसलिए इनके जन्म दिवस को भारतीय भाषा दिवस के रूप में घोषणा करना इनके
प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि कही जाएगी।तमिल भाषा के महान साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी श्री सुब्रमण्यम भारती के जन्मदिवस ( 11दिसंबर 1882) को भारतीय भाषा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय पिछले वर्ष भारत सरकार के द्वारा लिया गया।यह एक स्वागतयोग्य निर्णय है। विगत कुछ वर्षों से भारत में भारतीय भाषाओं के प्रति जो एक प्रकार का सकारात्मक वातावरण निर्मित हुआ है, उस दिशा में 11दिसंबर को देशभर में भारतीय भाषा दिवस के रूप मनाने का निर्णय और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।लंबे समय तक औपनिवेशिक वातावरण में रहने के कारण भारतीय मानस स्वाधीनता प्राप्ति के बावजूद स्वराज को समग्रता में प्राप्त नहीं कर पाया है।जब तक सही अर्थों में विचारों के स्वराज की स्थापना नहीं होगी तब तक हमारा स्वराज अधूरा है।इस वैचारिक स्वराज की स्थापना भारतीय भाषाओं की गरिमा को फिर से स्थापित करके ही प्राप्त किया जा सकता है। महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती ने भारतीय भाषाओं ,भारतीय साहित्य और संस्कृति के बीच एकत्व को स्थापित करते हुए सही मायने में भारतीय साहित्य की संकल्पना को मूर्त रूप देने का काम किया है। इसलिए इनके जन्म दिवस को भारतीय भाषा दिवस के रूप में घोषणा करना इनके प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि कही जाएगी। लगभग 40 वर्ष के अपने छोटे – से जीवन – काल में सुब्रह्मण्यम भारती ने तमिल साहित्य को रूप और अंतर्वस्तु की दृष्टि से एक नया आयाम दिया और उसे समग्रता में अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने का काम किया है।सुब्रमण्यम भारती का जन्म तो तमिलनाडु में हुआ लेकिन लंबे समय तक काशी में रहकर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ।यही कारण है कि इनके साहित्य में पूरा भारत प्रतिबिंब के रूप में उपस्थित होता है।गुरु गोविंद सिंह, लाला लाजपतराय,दादाभाई नौरोजी,बाल गंगाधर तिलक और महात्मा गांधी के संदर्भ में इन्होंने कई गीत लिखे हैं। तिलक और गांधी के प्रति इनकी अगाध श्रद्धा थी।संयोग से दोनों ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को अखिल भारतीय स्वरूप में नेतृत्व प्रदान किया है।इससे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रति महाकवि भारती की निष्ठा का पता चलता है।बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित ' वंदे मातरम् ' गीत को इन्होंने तमिल भाषा में दो प्रकार से अनुवाद कर प्रस्तुत किया।इतना ही नहीं,गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कई महत्वपूर्ण कहानियों का इन्होंने तमिल भाषा में अनुवाद किया दुनिया के जितने भी बड़े साहित्यकार हुए हैं,उन्होंने सृजन अपनी भाषाओं में ही किया है,चाहे वे कितनी भी भाषाओं के जानकार क्यों न हों।तुलसीदास, सूरदास,शंकरदेव,नरसी मेहता से लेकर सुब्रह्मण्यम भारती तक इसके साक्षी हैं संस्कृत,बंगला,तमिल,तेलुगु और अंग्रेजी इत्यादि कई भाषाओं के जानकर होने के बावजूद अपनी मातृभाषा तमिल के प्रति इनका अदभुत अनुराग था।तमिल भाषा की प्रशंसा में गाए उनके गीत आज भी अनेक मंचों पर लगातार गूंजते रहते हैं।अंग्रेजी के मोह में फंसे तमिल लोगों के मन में तमिल भाषा के प्रति अनुराग उत्पन्न कर उन्हें जागृत करने में इनकी बड़ी भूमिका रही है।
सुब्रह्मण्यम भारती ने एक ओर भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को निभाया ,वहीं दूसरी ओर भारतीय समाज के अंदर व्याप्त कुरीतियों और अंध विश्वासों को दूर करने का भी प्रयास किया।सामाजिक समरसता और स्त्रियों के प्रति सम्मान का भाव इनके साहित्य के महत्वपूर्ण उपादान रहे हैं ।सच्चे मायने में महाकवि भारती लोगों के भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार के उन्नयन के आग्रही थे।परंपरा और आधुनिकता का अद्वितीय समन्वय इनके साहित्य में देखा जाता है। ये एक ओर वेदों,उपनिषदों,पुराणों और अन्य आर्ष ग्रंथों के प्रेरक विचारों को आत्मसात कर
सृजन करते हैं तो दूसरी ओर आधुनिक तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का भी सम्मान करते हैं।स्वामी विवेकानंद,महर्षि अरविंद से लेकर भगिनी निवेदिता तक के विचारों का इनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है पत्रकारिता के क्षेत्र में भी इनका अदभुत योगदान है।तमिलनाडु से निकलने वाले दैनिक पत्र स्वदेशमित्रन में इन्होंने अपने विचारों से देशभक्ति के स्वर का भरपूर प्रसार किया,जिसकी अंग्रजी शासन को जानकारी मिलने पर इन्हें बाहर होना पड़ा और बाद में
इंडिया नामक पत्रिका से जुड़े जो स्वाधीनता आंदोलन के समय की पहली ऐसी पत्रिका थी, जिसमें राजनीतिक विषयों पर भी व्यंग्य और कार्टून छपते थे।इस प्रकार सुब्रह्मण्यम भारती ने न सिर्फ अपने साहित्य सृजन से बल्कि पत्रकारिता से भी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को एक सशक्त दिशा दी है।' भारतियार 'के नाम से प्रसिद्ध सुब्रह्मण्यम भारती ने भारतीय
भाषाओं,भारतीय साहित्य,भारतीय संस्कृति और भारतीय विचारों की पुर्नस्थापना में बड़ी
भूमिका निभाई है। सच्चे अर्थों में वे भारतीयता के उन्नायक रहे हैं।
डॉ.आलोक सिंह
असिस्टेंट प्रोफेसर
हिंदी विभाग ,पूर्वोत्तर पर्वतीय
विश्वविद्यालय,शिलांग ,मेघालय
मो.7308473440