गांधी विनम्रता और सेवा का एक उदाहरण – डॉ सौरभ वर्मा

नराकास सदस्य सचिव शिलचर
हिंदी प्रभारी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान शिलचर
2 अक्टूबर सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं है; यह एक सच्चे दूरदर्शी के जीवन और विरासत को याद करने और जश्न मनाने का दिन है। इस दिन भारत, राष्ट्रपिता मोहन दास करमचंद गांधी की जयंती मनाता है और गांधीजी द्वारा जीवन भर प्रचारित अहिंसा की सच्ची भावना को सम्मान और स्वीकृति देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है।
भारत में “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आशा की किरण और प्रेरणा के प्रतीक थे। उनका जीवन सत्य, अहिंसा और निःस्वार्थता के सिद्धांतों का उदाहरण है। महात्मा गाँधी जी ने कहा था की भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम वर्तमान में क्या करते हैं। जब भी हम महात्मा गांधी जी के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में दो शब्द आते हैं सत्य और अहिंसा क्योंकि वह इन दो आदर्शों में दृढ़ विश्वास रखते थे। उन्होंने कहा था की मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य ही मेरा भगवान है. अहिंसा उसे साकार करने का साधन है। गांधीजी का मानना था कि सत्य शब्द और कर्म मेंसापेक्ष सत्यता है, और पूर्ण सत्य अंतिम वास्तविकता है।
महात्मा गांधी को “राष्ट्रपिता” की उपाधि का सम्मान प्राप्त है व् वे भारत में राष्ट्रपिता के रूप में पूजनीय हैं। । यह भारत की स्वतंत्रता के लिए उनके लगातार सर्वोपरि प्रयासों के कारण था। वे आधुनिक भारत के निर्माता थे। महात्मा गांधीजी को स्वतंत्र भारत के संविधान द्वारा महात्मा को राष्ट्रपिता की उपाधि प्रदान करने से बहुत पहले, वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस ही थे जिन्होंने श्रीमती कस्तूरबा गाँधी के निधन पर महात्मा को अपने शोक संदेश में पहली बार उन्हें इस रूप में संबोधित किया था। भारत
छोड़ो आंदोलन के मद्देनजर बा और बापू को पुणे के आगा खान पैलेस में नजरबंद कर दिया गया था।
जेल की सजा काटते समय ही 22 फरवरी, 1944 को श्रीमती कस्तूरबा गाँधी का निधन हो गया। पुणे के आगा खान पैलेस में श्रीमती कस्तूरबा गाँधी की समाधि के पास ही बापू की अस्थियां रखी हुई हैं गांधीजी के साथ, अहिंसा की धारणा को एक विशेष दर्जा प्राप्त हुआ। उन्होंने न केवल इस पर सिद्धांत दिया, उन्होंने अहिंसा को एक दर्शन और आदर्श जीवन शैली के रूप में अपनाया। उन्होंने हमें समझाया कि अहिंसा का दर्शन कमजोरों का हथियार नहीं है; यह एक ऐसा हथियार है, जिसे हर कोई आज़मा सकता है। मोहनदास करमचंद गांधी ने अहिंसा के सिद्धांत को जीवन के सभी क्षेत्रों, विशेषकर राजनीति में सफलतापूर्वक प्रचारित किया। उनका अहिंसक प्रतिरोध आंदोलन क्रांतिकारी था; यह पहली बार था कि अहिंसा को उत्पीड़कों को प्रभावित करने के लिए एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया था। गांधीजी के राजनीतिक योगदान ने हमें आजादी दिलाई लेकिन उनकी विचारधाराओं ने इतने वर्षों के बाद भी आज भी भारत और दुनिया को प्रबुद्ध किया है। इस प्रकार, प्रत्येक व्यक्ति को सुखी, समृद्ध, स्वस्थ, सामंजस्यपूर्ण और धारणीय भविष्य के लिए अपने दैनिक जीवन में प्रमुख गांधीवादी विचारधाराओं का पालन करना चाहिए।
कैप्शन आगा खां पैलेस पुणे में महात्मा गांधी की समाधि पर सौरभ वर्मा

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