संवाददाता, डिब्रूगढ़ 14 सितंबर। शहर के अग्रणीय शैक्षणिक संस्थान डिब्रू महाविद्यालय के सभागार में हिंदी विभाग के तत्वावधान में हिंदी दिवस समारोह का पालन हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर “असम में राजभाषा हिंदी की दशा व दिशा” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। डिब्रू महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ रंजन चांगमाई की अध्यक्षता में आयोजित सभा में मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय विद्यालय, डिब्रूगढ़ के स्नातकोत्तर शिक्षक (हिंदी) ओंकार नाथ तिवारी व आमंत्रित वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार पाण्डेय के साथ महाविद्यालय की उपाचार्य चंदना गोगोई व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ समीर कुमार झा को मंचासीन किया गया। जिसके बाद मंचासीन अतिथियों को हिंदी विभाग की विद्यार्थियों ने फुलाम गमछा पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ रंजन चांगमाई ने सरस्वती माता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर दिया। इस दौरान अर्चना ठाकुर, रूपांजली झा, स्वप्ना सिंह व तुलसी गुरुंग ने गणेश व सरस्वती वंदना की प्रस्तूति की। सभा की उद्देश्य व्यख्या छात्रा खुशबू चौबे की। सभा मे उपस्थित विद्यार्थियों को हिंदी दिवस पर प्राचार्य डॉ रंजन चांगमाई व उपाध्यक्ष चंदना गोगोई ने हिंदी में संबोधित कर सभी का मनमोह लिया। वहीं इकोनॉमिक्स के विभागाध्यक्ष डॉ कमलेन्द्र सैकिया ने विद्यार्थियों की इच्छा का सम्मान रखते हुए मो. रफी के सुप्रसिद्ध हिंदी गीत की प्रस्तूति कर सभा मनमोहक बना दिया। सभा मे विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता केंद्रीय विद्यालय, डिब्रूगढ़ के स्नातकोत्तर शिक्षक (हिंदी) ओंकार नाथ तिवारी ने हिंदी के इतिहास का संक्षिप्त विवरण देते हुए कहा कि देश की आजादी में सबसे सक्रिय भूमिका अदा करने वाले स्वतंत्रता सेनानी देश के विभिन्न राज्यों व क्षेत्रों के थे। लेकिन देश व्यापी आंदोलन का नेतृत्व उन्होंने क्षेत्रीय भाषा मे।नहीं बल्कि हिंदी में की। देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी हिंदी बोलती है। इस लिए किसी भी कार्य को राष्ट्र स्तर पर ले जाने के लिए हिंदी की आवश्यकता है। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बापू की प्रारंभिक शिक्षा गुजराती मे और उच्च शिक्षा अंग्रेजी में हुई थी। लेकिन आजादी के आंदोलन में बापू ने सदैव अपना संबोधन हिंदी में किया। इसलिए हिंदी पूरे देश को एक सूत्र में बंधती है। इसके साथ ही उन्होंने विश्व मे हिंदी के बढ़ रहे वर्चस्व के संदर्भ में विस्तृत जानकारी विद्यार्थियों को दी। आमंत्रित वक्ता वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार पाण्डेय ने असम में हिंदी राजभाषा की दशा व दिशा के संदर्भ में कहा कि केंद्र सरकार हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए बहुत कार्य कर रही है पंर दुख की बात है कि डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय से कोई भी विद्यार्थी हिंदी में पीएचडी नही कर सकता। जिसके लिए विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों की खाक छाननी पड़ती है। वैसे में हिंदी का विस्तार कैसे होगा। उन्होंने आगे कहा विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के साथ ही क्षेत्रीय भाषा, मातृ भाषा व अंतरराष्ट्रीय भाषा का भी ज्ञान होना जरूरी है। ताकि अन्य लोगों तक हिंदी को पहुचाने में सहूलियत हो। हिंदी में बढ़ रहे रोजगार के संदर्भ में जानकारी दी। महाविद्यालय के हिंदी विभागध्यक्ष डॉ समीर झा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। सभा मे उपस्थित संस्कृत विभागाध्यक्ष डाॅ० अदीति बरूवा एवं ऐसिस्टेंट प्रोफेसर हिमाद्री शर्मा के साथ ही हिन्दी विभाग के डाॅ० ईवालरी के० दूनाई, रिंकी यादव व नूरफसा बेगम शिक्षिकाओं ने भी अपने विचार सभा मे प्रस्तुत किया। हिंदी दिवस समारोह में पारो शर्मा व करिश्मा रजक ने नृत्य व नेहा दास ने गीत की सुमधुर प्रस्तूति की। हिंदी की महत्वता को दर्शाते हुए मुस्कान साह, प्रियंका शर्मा, ममता राय, रिया महतो, पारो शर्मा व नेहा दास ने नाटक की प्रस्तूति कर सभी को रोमांचित कर दिया। सभा का संचालन रूपांजली झा व अर्चना ठाकुर ने की। जबकि धन्यवाद ज्ञापन पूजा साह ने की।