(इस्ट)-“इंडिया”-(कम्पनी) ……(१)

बैंगलोर में हुवे बेमेल जोडियोँ के सामूहिक विवाह आन्दोलन में जैसे-जैसे अजूबे दिखे वो अपने आप में अत्यधिक कष्टदायक हैं ! वास्तव में इसे-“(इस्ट)-“इंडिया”-(कम्पनी)” की संज्ञा दी जा सकती है।ये ऐसा शिखर सम्मेलन था जिसमें राष्ट्रीय स्तर के अंतर्राष्ट्रीय अलगाववादियों ने ये स्पष्ट रूप से स्वीकार कर लिया कि उन्हें सत्ता चाहिये ! वो किसी भी कीमत पर मिले ! इसके लिये समूचे देश को जलाना पडे! इन्हें कश्मीर में पुनश्च धारा- 370 लगानी है। जिस परिवार का पूरा कुनबा बेल पर है ! जिनकी संसदीय सदस्यता रद्द कर दी गयी ! नेशनल हेराल्ड, इमरजेन्सी, बोफोर्स,कोयला,2जी स्पेक्ट्रम,काॅमन वेल्थ,वक्फ, सत्यम,तेलगी, सिक्योरिटी जैसे तीन सौ से अधिक घोटालों का जिनपर आरोप है ! जिनमें १५% से अधिक सिद्ध हो चुके अट्ठारह सौ से अधिक दंगे,सौ से अधिक अतिविवादित विधेयक, अलगाववादियों को संरक्षण देने में जो सिद्धहस्त हैं ! ऐसी कांग्रेस आज उसी आम आदमी पार्टी के साथ खडी दिखती है जिनकी शत्रुता साँप-नेवले जैसी विश्व प्रसिद्ध है ! आदरणीय मित्रों ! मैं समझता हूँ कि इन सभी दलों का साझा सिद्धांत स्पष्ट है कि जिस प्रकार-मोहम्मद गोरी,गजनवी, अकबर,बाबर,हुमायूँ, औरंगजेब जैसे दुर्दांत मानसिक रूप से विकृत हत्यारों ने हिंदू धर्म को नष्ट करने हेतु तलवार का प्रयोग किया, बिलकुल उसी प्रकार कांग्रेस ने हिंदू धर्म को नष्ट करने हेतु-“गांधी,नेहरू, अंबेडकर साहिब, सत्ता,आयोग,धन,दंगे,पुलिस-प्रशासन,शस्त्र, संविधान अनेक अधिनियमों, विधेयकों का प्रयोग किया और धीरे-धीरे चर्च+मुस्लिम +कम्यूनिस्ट +कांग्रेस ने मिलकर लगभग आठ सौ वर्षों में भारतीय संस्कृति को तहस-नहस कर दिया। मुगलिया नीति पर चलते हुवे तलवार और प्रकारान्तर से संवैधानिक-“जजिया” अर्थात सेक्युलर होने के नाम पर आजतक हिन्दुओं को उनकी सहिष्णुता की सजा दी ! और- “आज वैसा ही बीजेपी सरकार भी करती दिखती है।
आज हिन्दू समाज को-ममता,राहुल,महेबूबा मुफ्ती,अरविंद केजरीवाल के दलों की नीति ! कथनी और करनी में ! और बिलकुल उसी प्रकार बीजेपी की भी कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर दिखता है।
आज भी मस्जिद और चर्च स्वतंत्र हैं,किन्तु हमारे मंदिर केन्द्र तथा राज्यों के अधीन हैं ? चर्च की गुण्डागर्दी की बिलकुल ताजी मिसाल मणिपुर के मैतेयी समुदाय की बच्चियों के साथ करायी गयी सार्वजनिक पैशाचिकता में दिखती है ! इन हैवानों को पाला-पोषा कांग्रेस और कम्यूनिस्टों ने किन्तु आज वहाँ सरकार बीजेपी की है ! मणिपुर में फैलायीं हिंसा का मूल कारण यही है। (इस्ट)-“इंडिया”-(कम्पनी) की सदस्या वही मायावती हैं जिन्होंने-“तिलक तराजू और तलवार । इनको मारो जूते चार॥” का नारा दिया था ! जिन्होंने अपने वरिष्ठ नेता कांशीराम को शाहजहाँ की तरह बन्दी बनाकर मार डाला! जिनके हांथी की चिघ्घाड से उत्तर प्रदेश के हिन्दू बर्बाद हो गये ! मुलायम सिंह की मुस्लिम परस्ती-अयोध्या में निरीह कारसेवकों की सामूहिक हत्या ! और शाहबजादे ने तो टोंटी तक चुरा ली।
बैंगलोर के सार्वजनिक हमाम में इकट्ठे हुवे वैचारिक नग्न लोगों को मणिपुर की घटना में महिला उत्पीड़न दिखा ! ममतामयी मम्मी को मणिपुर की घटना दिखती है,अरविंद केजरीवाल घडियाली आँसुओं से सराबोर दिखते हैं ! किन्तु क्या किसी को भी कश्मीरी पत्थर बाजों का हमारी सेना पर आक्रमण ! नहीं दिखा ? १९९२ कांग्रेस कैसे भूल गयी ? नेशनल कान्फ्रेंस आज किस अत्याचार की बात करती हैं  ? इन घटिया लोगों को अभीतक जम्मू और दिल्ली में रहते शरणार्थी कश्मीरी पंडित नहीं दिखे ! किन्तु इन्हें रोहिंग्या और बांग्ला देशी घुसपैठियों के साथ-साथ पाकिस्तान के उन आतंकवादियों से सहानुभूति है जिनके धमाकों की गूंज अभी तक भारत की आत्मा को चोट पहुंचाती है।
सोची समझी रणनीति से सन् १९५४ में विशेष विवाह अधिनियम लाया गया था जिसके द्वारा मुस्लिम लड़के- हिंदू लड़कियों से निकाह कर सकें,और कम्यूनिस्टो के साथ-साथ एकमात्र भारतीय जनसंघ के अतिरिक्त सभी विपक्षी दलों ने अधिनियम का निर्विरोध समर्थन किया था।
जब हमारी बेटियों के साथ श्रीनगर के लालचौक में सामूहिक बलात्कार हो रहा था ! उन्हें नंगी कर बीच से चीर दिया गया था !  क्या उसकी आजतक कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस ने निन्दा की ? शेष अगले अंक में –“आनंद शास्त्री”

(इस्ट)-“इंडिया”-(कम्पनी) ……(२)
प्रिय मित्रों ! सीपीएम और माकपा ने कभी भी आदिवासी और गरीबों के हित की बात अपने सत्ता काल में की ? नक्सलवाद से लेकर जेएनयू के गलियारों तक भारत को तोडने की कोशिश के अतिरिक्त इन्होंने किया ही क्या ? ये भूल जाते हैं कि १९७१ में जब भारतीय सेना और नार्थ ईस्ट की जनता के साथ समूचा भारत इन्दिरा गांधी के साथ खडा था तब जब चीन ने पाकिस्तान के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप की धमकी दी तो आज के नागालैण्ड, मीजोरम जैसे क्षेत्रों में इनके लोग हंसिया बाली के लाल झंडे अपने घरों पर लगाकर चीनी सेना के स्वागत की तैयारी कर रहे थे।
यहाँ मैं आपको आज की उद्धवी अर्थात उधमी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का वक्तव्य दिखाना चाहता हूँ,वे स्पष्ट
कहते हैं कि-“राजनीति में विचारधारा अलग तो होती ही है लेकिन हम देश के लिए एक हुए हैं। लोगों को लगता है कि हम परिवार को बचाने के लिए एक हुए हैं, देश हमारा परिवार है और उसे बचाने के लिए हम एक हुए हैं। इस तानाशाह सरकार के खिलाफ हम लड़ेंगे।
–“अर्थात ये लोग ! “मनसे” के भी लोग देश को परिवार कब से समझने लगे ? जब “मुम्बई मानुष” के लिये -“आमची मुम्बई” कहकर मुम्बई में रहते समूचे देश के गरीबों को पीट-पीट कर ये भगा रहे थे ! पच्चीस वर्ष से भगा रहे थे ! तब बीजेपी भी सत्ता लोलुपता के कारण इनसे गठबंधन के नाम पर चुप थी ! तब -“देश इनका परिवार नहीं था ?”
“करुणा निधि” की करुणा कौन नहीं जानता  ? हिन्दी भाषा के लिये समूचे तमिलनाडु और दक्षिण भारत में घृणा फैलाने के अतिरिक्त इन्होंने क्या किया ? किसी भी अन्य भाषायी के व्यापारी और मजदूर को इनके लोगों ने शिवसेना की ही तरह मारा ! पीटा ! और भागने पर मजबूर कर दिया और आज स्तालिन,उनका बेटा उदय और दामाद के साथ-साथ परिवार के तीन और सदस्य सत्ता में हैं ! क्या इसी परिवार को बचाने के लिए तो द्रमुक परेशान नहीं है ? इन्हें तमिलनाडु की चिन्ता नहीं है और ये देश की चिन्ता करेंगे ?
मैं समझता हूँ कि नीतीश कुमार को झेलने की क्षमता इन लोगों में नहीं है ! वैसे ही -“राजभर” का पेट भरने की क्षमता बीजेपी में भी नहीं है ! बहुत ही जल्दी सुशासन बाबू बीजेपी में और राजभर इस्ट इंडिया कम्पनी के साथ खडे दिखेंगे। इन्होंने नाम   टीम INDIA Vs टीम NDA चक दे इंडिया” दिया है ! सोच समझ कर दिया है ! यह प्रस्ताव राहुल गाँधी का था ! “भारत जोडो”(तोडो) यात्रान्तर्गत इस नाम का प्रयोग करने की योजना कनाडा से यहाँ आयात की गयी है ! आप यूँ भी कह सकते हैं कि चर्च और आईएमएफ के डंडे से “खालिस्तानी” झंडे को हटाकर उसके स्थान पर तिरंगे को लगाकर-“भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअऽल्लाह इंशाअऽल्लाह” के नारे लगाते यही लोग दिखेंगे।
ये कडवी सच्चाई है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की केन्द्रीय सरकार के साथ-साथ भारतीय सेना के पराक्रम पर उंगली उठाने वाली कांग्रेस के साथ लगभग ये सभी दल तब भी थे ! किन्तु मुझे अब भय लगता है ! डर लगता है आने वाले कल की भारतीय गंदी राजनीति से ! तक्की से तरक्की नहीं होगी ये कहने वाले भगवाधारियों से भी अब डर लगता है ! एक ऐसी आनेवाली सरकार से भयभीत हूँ मैं- जिनके सर पर तक्की या भगवा गमछा होगा ! मुख पर बकरे जैसी डाढी अथवा त्रिपुण्ड होगा ! ह्रदय पर रुद्राक्ष की माला अथवा कोट पर जनेऊ होगा ! किन्तु ये निश्चित है कि अधोवस्त्र के नीचे -“”सुन्नत”” होगी।
क्या आने वाले कल भारत ऐसा घोषित-“हिन्दुस्थान” होगा जहाँ चर्च और तक्की का शासन होगा ? क्या कुछ ऐसा ही संदेश राजभर को एनडीए में शामिल कर हमारे प्रधानमंत्री जी दे रहे हैं ? क्या आने वाले कल असवुद्दीन ओवैसी बीजेपी शासित भारत के गृहमंत्री होंगे ? अथवा वाड्रा की मैडम जी इस्ट इंडिया कम्पनी की प्रधानमंत्री और ममता के हाथों अखण्ड बंगाल की बागडोर सौंप भारत के और दो टुकड़े कर अरविंद केजरीवाल इस्ट इंडिया कम्पनी के गवर्नर(रक्षामंत्री) बनेंगे ?
मैं समझता हूँ कि समय हांथों से निकल रहा है ! लग्जरी गाडियों से उतरकर एसी भवनों से निकल कर ! राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को श्रीमान-“योगी आदित्य नाथ” जी के निर्देशानुसार बीजेपी की भविष्य की योजनाओं और २०२४ के घोषणा पत्र की रचना करनी चाहिए ! आज समूचा बुद्धिजीवी हिन्दुत्ववादी समाज चिन्तित है कि अल्पसंख्यक(?) तुस्टीकरण हेतु यूसीसी की सफलता के लिये ही तो कहीं भगवे झंडे को हटाकर हरी चादर लगाकर बीजेपी स्वयं ही अपने पतन का ! दफन का कफन बना रही है ? शेष अगले अंक में –“आनंद शास्त्री”

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