“अंतरराष्ट्रीय योग दिवस”

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की सभी को बहोत बहोत शुभकामनाए I ऐसा माना जाता है की आज ही के दिन योग का जन्म पृथ्वी पर हुवा था महर्षि पतंजलि ने अपने १००० शिष्यों को योग का ज्ञान मौन में दिया था I इसीलिए आज ही के दिन को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मानने चुना गया है जिसमें दुनिया के सभी देशों के लोग साथ में आते है और योग करते है I
योग याने सिर्फ़ आसन नहीं है, योग का मतलब है जुड़ना, अपनी चेतना की उच्चतम अवस्था के साथ जुड़ना I हमारे ऋषि मुनि यज्ञ के द्वारा हवन के द्वारा मंत्र जाप के द्वारा और आसनो के द्वारा अपनी चेतना की उच्चतम अवस्था से एकरूप हुवे है I योग के अलग अलग प्रकार है अष्टांग योग, श्री श्री योग, राज योग, भक्ति योग, ज्ञान योग, लय योग, क्रिया योग और भी कई तरह के योग प्रचलन में है I योग पर कई ग्रंथ लिखे गए है और लगभग सभी ग्रंथो ने योग करने की सलाह दी है I योग पर लिखे प्रमुख ग्रंथो में महर्षि पतंजलि द्वारा “पतंजलि योग सूत्र” महर्षि घेरंड द्वारा “घेरंड संहिता” स्वामी स्वातमाराम जी द्वारा “हठ योगप्रदीपिका” और साक्षात कृष्ण जी द्वारा “भगवद् गीता” I
योग की जब भी बात चले महर्षि पतंजलि का नाम अवश्य आता है I पतंजलि योग सूत्र में १९५ सूत्र है जिनको महर्षि जी ने  चार अध्याय में बाटा है I
१ समाधिपाद ५१ सूत्रों में महर्षि जी ने मन के उतार चढ़ाव (modulations of mind)I  योग के मार्ग पर आने वाली ९ अड़चने/बाधायें  ( nine obstacles on the path), उनसे बाहर आने के ८ उपाय ( eight resolutions), समाधि के अलग अलग प्रकार बताए और सबिज और निर्बिज समाधि / सवीकार और निर्विकार  समाधि के बारे में विस्तार से समझाया है I
२ साधनापाद के ५५ सूत्रों में क्रिया योग, पंच क्लेश और उसके उपाय, अष्टांग योग के पाच अंग जिन्हें बहिरंग योग भी कहा जाता है १ यम:- वैयक्तिक नैतिकता ( personal ethics) अपना जीवन कैसे जीना २ नियम:- सामाजिक नैतिकता (social ethics) समाज में कैसे रहना I  ३ आसन:- शरीर मन और साँसो को स्थिर और सुखमय रखना  ४ प्राणायाम:- पूरक रेचक और कुम्भक (अंतर और बाह्य) से प्राणायाम होता है  और ५ प्रत्याहार:- पंच इंद्रियो का श्रेष्ठ  भोजन I
३ विभूतिपाद के ५५ सूत्रों में महर्षि जी ने अष्टांग योग का अंतरंग योग धारणा ध्यान समाधि समझाया है, और जब तिनो साथ में आते है तब कैसे संयम रूपी विभूतियाँ हमारे जीवन में प्रवेश करती है उसे बहोत ही उत्कृष्ट तरह से समझाया है I
४ कैवल्यपाद  के ३४ सूत्रों में महर्षि जी ने धर्म मेघ समाधि और कैवल्य/मोक्ष का मार्ग बतलाया है I
घेरंड संहिता में योग के छह अंगो का वर्णन मिलता है जिसे षट्कर्म भी कहते है I १ नेती:- नाक की सफ़ाई २:- धौति:- पाचन तंत्र की सफ़ाई ३ वस्ति:- बड़ी आँत की सफ़ाई ४ नौली:- पेट का व्यायाम ५ कपालभाती:- मस्तिष्क के अग्र भाग की सफ़ाई और ६ त्राटक:- मानसिक एकाग्रता बढ़ाना I इसमें विविध आसान, विविध मुद्रायें, प्रत्याहार, प्राणायाम और ध्यान और समाधि की चर्चा है I
हठ योगप्रदीपिका में स्वामी स्वातमाराम जी ने योग के ४ अंगो का वर्णन किया है I १ आसन:- सिद्धासन और पद्मासन जैसे १५ आसनो और आहार (food) का विस्तार से विश्लेषण किया है I २ प्राणायाम:- प्राणायाम की उपयोगिता और विशेषता, षट्कर्म और अष्टकुम्भकों का विस्तार पूर्वक वर्णन किया है I ३ मुद्रा:- १० मुद्रा और कुंडलिनी का वर्णन किया है I ४ नादानुसंधान:-  नाद-नादानुसंधान-समाधि की विस्तृत चर्चा की गई है I
भागवद् गीता में भगवान श्री कृष्ण ने १ कर्म योग:- अनासक्त कर्म, बिना राग-द्वेष के कर्म, लाभ-हानि जय-पराजय की चिंता के बगैर कर्म करना, , २ ज्ञान योग:- सबको समान समझ कर कर्म करना,  धर्म युक्तकर्म करना, अज्ञान को तत्व ज्ञान से हटाकर, ज्ञान से दोष रहित होना I ३ भक्ति योग:- ईश्वर मेरे अपने है I ईश्वर सब से प्रेम करते है और हम भी ईश्वर से प्रेम करते है I गुरुदेव पूज्य श्री श्री रविशंकर जी अक्सर एक बात बताते है जब रसगुल्ला खाया तब उसका ज्ञान हुवा ये है ज्ञान योग, फिर उसे और खाने के लिए जो क्रिया कि वो हुवा कर्म योग और जब रसगुल्ला पसंद आने लगा तो हुवा भक्ति योग I  भगवद् गीता के अध्याय ६ आत्म संयम योग में अर्जुन को मन की चंचलता को कैसे योग के माध्यम से संयम में लाए यह समझाया है, और मन को मित्र बना कर रखने की सलाह दी है I
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी कहते है योग चेतना का विज्ञान है और सबसे अवर्णनीय घटना है I  स्थूल से सूक्ष्म की और जाने की यात्रा है योग I
योग हर साधक को कैसे जीवन जीना यह सिखाता है I हर साधक के रीढ़ की हड्डी है , साधना का आधार है और साधक को मानसिक भावनात्मक और अलग अलग तरह के तूफ़ानो से बचाता है योग I
कुछ  लोगों के लिए योग सिर्फ़ वजन घटाने का तरीक़ा है (weight loss program) योग इससे बहोत आगे की यात्रा पर ले जाता है I जो लोग सिर्फ़ बीमारियों से बचाने के लिए योग करते है वो उसकी गहराइयों से वंचित रह जाते है I समुद्र किनारे की हवा खाकर ही वो लोग चले जाते है I समुद्र में तो तरह तरह के ख़ज़ाने भरे है I योग तो जीवन में किसी भी आयु में शुरू कर सकते है, जीवन में जितने कम उम्र से योग करना शुरू करते है उससे उतने जादा लाभ मिलते है I योग कोई भी किसी भी उम्र में शुरू कर सकते है I दुबला इंसान शारीरिक शक्ति के लिए, मोटा इंसान स्नायुवो में मज़बूती और शक्ति के लिए बीमार इंसान स्वस्थ रहने के लिए, स्वस्थ इंसान स्वास्थ बनाए रखने के लिए, बच्चे एकाग्रता के लिए, महिलायें शारीरिक-मानसिक स्वास्थ के लिए, व्यापारी कुशाग्र बुद्धि के लिए, कर्मचारी मन की शांति बनाए रखने के लिए योग कर सकते है I आज की इस भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में योग सभी करते है फ़िल्मी सितारे, खेल जगत की मशहूर हस्तियाँ, राजनैतिक हस्तियाँ, देश और दुनिया के जाने माने व्यापारी,  जाने माने वैज्ञानिक रोज़ योग करते है I
महर्षि पतंजलि बताते है साधनापाद श्लोक १६ में “हेयम दुःखम अनागतम” जीवन में आने वाले दुखो को रोकने का मार्ग है योग I योग करने से सिर्फ़ शारीरिक फ़ायदे ही नहीं मानसिक, आध्यात्मिक, पारिवारिक, व्यापारिक फ़ायदे भी होते है I
आइए जानते है शरीर मन और चेतना पर योग का क्या प्रभाव पड़ता है:-
शरीर:- की मांसपेशियों में लचीलापन, मांसपेशियों और हड्डियों में शक्ति आती है, शरीर संरेखण (body alignment) होता है और पाचन शक्ति-रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है I
मन:- की शांति मिलती है और बढ़ती है, सतर्कता, स्पष्टता, एकाग्रता और आत्म सम्मान बढ़ता है I
चेतना:- बिना कारण ही आनंदित रहना और उस आनंद को और प्रेम को संसार में बाटना I
योग हमेशा योग्य प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में ही करे I सभी लोग रोज़ योग, प्राणायाम, सुदर्शन क्रिया और ध्यान अवश्य करे I
स्वामी सत्यानंद जी वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय शिक्षक, दी आर्ट ऑफ़ लिविंग ऑर्गनायज़ेशन, बँगलोर

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