अपने अपने पाप से मर जाते हैं आपो-आप—

राग ऐ कश्मीर अलापते अभी तो दिल भरा नहीं ! कि ये क्या हुवा ? कैसे हुआ ? क्यूँ हुवा ? कब हुवा ? की धुन पर समूचा पाकिस्तान थिरकने लगा ! हकीकत मे  हमारे विदेश मंत्री एस• जयशंकरजी ने पी•ओ•के• का नाम क्या लिया कि समूचे पाकिस्तान में खुदा ने ऐसी आग लगायी कि -“वो तो गली-गली इमरान धुन गाने लगी”।

बेशक रूस में जैसे ही विक्टरी परेड का समापन होता है, वैसे ही इमरान खान की गिरफ्तारी होना अपने आप में बिलकुल भी हैरत अंगेज घटना नहीं है ! ये कडवी हकीकत है कि इमरान खान के सत्तानशीं रहते नाटो देशों से यूक्रेन को दिये जाने वाले हथियार पहले पाकिस्तान आते थे ! यहाँ पाकिस्तानी फौज उनमें चोरी करती थी और बाद में पाकिस्तान अपने यहाँ बनी पुराने हो चुकी सडी-गली सैन्य सामग्री, आर्टिलरी यूक्रेन भेज देता था जिसके बूते लडने वाली वहाँ की सेना अक्सर मुँह की खाती थी, 

दूसरी ओर रूस और चीन भी पाकिस्तान की इस नापाक हरकत से बेहद खफा थे ! अमेरिकी सरकार तो पहले से ही पाकिस्तान से जली-भुनी बैठी है, और बाजवा अर्थात पाकिस्तानी सेना के रहनुमा पर की हुयी टिप्पणी इमरान के लिये फांसी का फन्दा बन चुकी है।

जुल्फीकार अली भुट्टों ऐसे शख्स थे जो पहले “सद्र ऐ जम्हूर” और इसके बाद पाकिस्तान के वजीरे आलम बने और इसके बाद वहां के सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक के हुक्म से सेना ने तख्तापलट कर उन्हें आखिरकार रात को दो बजे फांसी पर लटका दिया ! वैसे उडती खबरें ये भी हैं कि बेगम बेनजीर भुट्टों की आत्मघाती हमले में हुयी हत्या में भी इनका हांथ था, कदाचित् मियाँ बिलावल उनका बदला लेने का खेल तो नहीं खेल रहे हैं  ?

चीनी विदेश मंत्री के पाकिस्तान से रुखसत होते ही इस खेल का होना ! चीनी कर्मचारियों पर पाकिस्तान में हो रहे अंधाधुंध हमलों को रोकने की जुबान देने वाले आज कांची,इस्लामाबाद, पेशावर,रावल पिंडी,लाहौर ही क्या पूरे पाकिस्तान को दोजख की आग में जलते दीदार करना अपना मुस्तकबिल मानने को लाचार हैं ।

खालिस्तानियों को अपने यहाँ पनाह देने वाले ! तालिबान के हिमायती आज P•T•I• के कारण नमाज ऐ जनाजा मतलब फातिहा पढने की तैयारी कर रहे हैं ।

वैसे पाकिस्तानी अमन नापसंद करने वाली अवाम की खिदमत में हमने एक शेर अर्ज किया है–

“अलविदा हो हींद से जिन्नात दोजख में गये ।

मखलूक की इमदाद को तीन बेटे ले गये ॥

सबसे बडे रिश्वत अली मंझले खुशामद बेग हैं।

छोटे सिफारिश खान हैं,जिनकी निराली शान है॥

कत्ल के भी जुर्म में रिश्वत अली की जीत है।

सख्त हाकिम हो,पर गाता उन्हीं के गीत है।

गर नौकरी मिलती न हो,मिलिये सिफारिश खान से।

लायकियत कुछ भी न हो,पर कर हूकूमत शान से ॥

“आनंद”खुशामद बेग को ले गोद में कुछ काम कर।

जी हुजूरी सीख ले फिर चाहे जो व्यापार कर ॥”

ये फलसफे मरहूम जिन्ना की खिदमत में उनके कशीदे काढने को हमने लिखे थे ।

अफगानिस्तान से चोरी कर लाये गये बारूद के जखीरे आज खुद पाकिस्तान की सडकों पर अपने जलवे दिखा रहे हैं, I•M• F, अपने बेहतरीन दोस्त चीन से लेकर अरब-अमेरिका तक इमदाद लेने के लिये भीख का कटोरा लेकर अपनी तौहीन कराते वहाँ के हुक्मरानों को आज कयामत दिख रही है ! मुर्दे कब्रों से निकल कर इस्लामाबाद की सडकों पर सरपट दौड रहे हैं ।

आज मुल्क के बाशिंदों की दस्तरख्वान पर दो जून की रोटियां दिखनी बंद हो गयी हैं,बात बात पर परमाणु बम फोडने की गीदड भभकी देने वाले लोग आज खौफजदा हैं कि कहीं उनसे P•O•K•भी छिन न जाये, मतलब-“लाहौल बिला कूबत”।

वैसे इत्मीनान रखिये जनाब ! आपके यहाँ कुकुरमुत्तों की तरह बिजबिजाते टुकड़े-टुकड़े गैंग बहुत जल्द ही आपको 786 टुकडों में तब्दील कर देंगे !  बलूचिस्तान, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा पहले से ही रुखसत होने पे आमदा हैं– आमीन !–“आनंद शास्त्री”

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