दिल्ली के छात्रों ने शनिवार को आसाम विश्वविद्यालय का दौरा किया

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की विशेष कार्यक्रम के तहत ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत युवा संगम’ अनुष्ठान का हिस्सा शैक्षिक यात्रा पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय सहित दिल्ली के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के पचास छात्रों का एक समूह ने शनिवार को आसाम विश्वविद्यालय का दौरा किया। एनआईटी सिलचर और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की संयुक्त पहल पर आयोजित इस युवा संगम कार्यक्रम अगले 4 अप्रैल तक चलेगा। इस दिन पहले आगत अतिथियों को विश्वविद्यालय के नक्षत्र वन में ले जाया गया। आसाम विश्वविद्यालय के कुलपति अध्यापक राजीव मोहन पंत ने छात्रों के साथ आगत जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के तीन अध्यापक ड. अनामिका, ड. प्रकाश साहू, ड. प्रवीण कुमार भाटी, एनआईटी सिलचर के चार अध्यापक ड. बिप्लब दास, ड. आशा रानी एम, ड. जीबनजोत सिंह,  ड. राम किंदास्वामी को उत्तरीय पहना कर स्वागत किया।तत्पश्चात कुलपति पंथ ने छात्रों एवं अतिथियों के सामने संबोधित करते हुए बराक घाटी के कृष्टि संस्कृति का संक्षिप्त इतिहास के बारे में चर्चा किया।उन्होंने आगे बताया कि आसाम विश्वविद्यालय परिसर के नक्षत्र वन में विभिन्न औषधीय पौधे हैं। प्रत्येक पेड़ का ‘क्यूआर कोड’  है जिसे स्कैन करके पेड़ का नाम और उसके लाभ और अन्य विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है। मूलत: भारतीय ज्योतिर्विज्ञान के सत्ताईस नक्षत्र की बात ध्यान में रखते हुए इस उद्यान में सत्ताईस विभिन्न प्रजातियों के औषधीय पौधों को लगाया गया है। इसके अलावा, ज्योतिर्विज्ञान के बेहतर गवेषणा एवं अवलोकन के लिए ‘आर्यभट्ट वेधशाला’ की स्थापना की गई है। इस वेधशाला में उत्तर पूर्व भारत के सबसे बड़ी दूरबीन – 14 इंच का सेलेस्ट्रॉन रिफ्लेक्टर है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय में ‘युद्ध संग्रहालय’ एवं ‘आदिवासी संग्रहालय’ स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा ड. देवतोष चक्रवर्ती, ड. हिमाद्री शेखर दास प्रमुख ने भी प्रासंगिक भाषण दिए। इसके बाद छात्र छात्राओं ने विश्वविद्यालय के रवींद्र पुस्तकालय, इंस्टीट्यूट ऑफ जियोमैग्नेटिज्म ऑब्जर्वेटरी, वार म्यूजियम का दौरा किया। शाम को, भौतिकी विभाग के कॉन्फ्रेंस हॉल में आए हुए छात्र छात्राओं के समूह ने आसाम विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं के साथ मत का आदान-प्रदान किया। इसके बाद आर्यभट्ट वेधशाला भी दूरबीन की सहायता से रात्रिकालीन आकाश का निरीक्षण करने के लिए व्यवस्था की गई थी। मौसम अनुकूल नहीं रहने के कारण केवल चंद्रमा को पर्यवेक्षण किया गया।अतिथियों ने पूर्वोत्तर में एक प्रत्यंत स्थान में ऐसी वेधशाला की स्थापना की प्रशंसा की। अतिथि शिक्षकों ने अपने मत प्रकाश करते हुए कहा कि तीन घंटे के इस शैक्षिक भ्रमण में विद्यार्थियों ने बहुत कुछ सीखा एवं लाभान्वित हुआ।

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