समाज संगठित हो
समाज संगठित हो इकट्ठा होकर एक साथ रहना ही समाज कहलाता है। जबतक हम बिखरे रहेंगे तबतक उत्थान से पिछड़े रहेंगे अर्थात जबतक हम जाति – प्रजाति, भाषा,अमीरी- गरीबी, ऊँच – नीच, स्वार्थी विचार वाले मतभेदों मे बंटे रहेंगे तबतक समाज मे हमारा उचित महत्व नही मिल पाएगा। पूरी तरह से संगठित होकर एकत्व भाव … Read more