” मेरा अभिलाषा “
” मेरा अभिलाषा “ बोल सिखा दूं गूंगों को आवाजों मे पर नही है जीभ जिंदा हूँ पर ठहरा जनाजों मे॥ दिखाऊँ अंधे को उजाले नजारों मे पर नही है ज्योति भटक गया हूँ काले अंधकारो मे ॥ चलना सिखा दूं लंगड़े को पहाड़ो मे पर नही बैसाखी रो रहा हूँ गिरकर हजारों … Read more