ग्रामीण-केंद्रित भारतीय सामाजिक यथार्थ के सौंदर्यशास्त्रीय भाष्यकार : मुंशी प्रेमचंद
ग्रामीण-केंद्रित भारतीय सामाजिक यथार्थ के सौंदर्यशास्त्रीय भाष्यकार : मुंशी प्रेमचंद बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक काल में जिन कुछ मनीषी साहित्यकारों ने भारतीय साहित्य पर गहरा, स्थायी और व्यापक प्रभाव डाला, उनमें मुंशी प्रेमचंद सर्वप्रथम स्मरणीय हैं। साहित्य-जगत में वे सर्वमान्य रूप से ‘उपन्यास-सम्राट’ के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को हुआ। … Read more