प्रतिष्ठित साहित्यकार मिथिलेश भट्टाचार्य एक संस्मरण — मीता दास पुरकायस्थ
“मृत्यु कोई अंत नहीं, वह केवल जीवन के दूसरे सुर में प्रवेश है।” — रवींद्रनाथ ठाकुर अचानक जैसे आकाश का सीना फट गया और उसने एक नक्षत्र को अपने में समा लिया — 20 अक्टूबर 2025 की रात। आकाश और उज्जवल हो उठा, पर शिलचर की एक प्रकाशमयी किरण चुपचाप बुझ गई — चले गए … Read more