अंतर्शक्ति को जगाता है ‘मौन'(अध्यात्म) — सुनील कुमार महला
पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति के इस दौर में जीवन बहुत ही आपाधापी और भाग-दौड़ वाला हो गया है। मनुष्य दिनभर में अंट-शंट बातें करता है, इधर-उधर की सुनता है और बात-बात पर आलतू-फालतू में अपने विचारों को प्रकट करता है। कोई भी आज की इस दुनिया में ‘मौन’ नहीं रहना चाहता। व्यर्थ की बातें और गप-शप में … Read more