“सिंहासन खाली करो कि जनता आती है !”– आनंद शास्त्री
सम्माननीय मित्रों ! महाभारत युद्ध के निहितार्थ अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं ! जन्मान्ध अंधे धृतराष्ट्र के उन वचनों को आप स्मरण करें – ” धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमऽकुर्वन्तु सञ्जयः॥” अर्थात धृतराष्ट्र की बुद्धि आप देखिये-“मेरे और पाण्डु के पुत्र” ? अर्थात भाई भाई के पुत्र अलग हैं ? अर्थात हमारी मातृसंस्था और … Read more