धम्मपद्द यमकवग्गो~सूत्र -७ अंक~७ — आनंद शास्त्री
सम्माननीय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित-“धम्मपद्द” के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में यमकवग्गो के सातवें पद्द का पुष्पानुवाद भगवान श्रीतथागत के श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ— “शुभानुपस्सिं विहरन्तं इन्द्रियेसु असंवुतं। भोजनम्हि अमत्तञ्ञुं कुसीतं।हीनवीरियं। तं वे पसहति मारो वातो रूक्खं व दुब्बलं।।७।।” और इसे संस्कृत में कहते हैं … Read more