पितृसूक्त मंत्र~तृतीय भाग तृतीय अंक सात आनंद शास्त्री
प्रिय मित्रों ! अपने पितृ-गणों को समर्पित करता हुवा यह श्रृंखला ! अपने पूर्वजों के चरणों में इसकी तृतीय ऋचा का तृतीय अंक मैं प्रस्तुत करता हूँ- “आहं पितृन् त्सुविदत्रां अवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः। बहिर्षदो ये स्धया सुतस्य भजन्त पित्वस्त इहागमिष्ठाः॥” ऋषि कहते हैं कि-उत्तम ज्ञान से युक्त पितरों को तथा अपानपात् और … Read more