पुत्रिकामेष्टि की ओर बढ़ता समाज जान गया है, छुपाना ही बीमारी है
नई दिल्ली, पुत्रिकामेष्टि कथा कहने के लिए साहस चाहिए। समाज में जिन विषयों पर सोचना भी वर्जित है, वहां सहजता से उस बात को लिख जाना, एक धारा के विपरीत रचते लेखक के बस की ही बात है। यह बात प्रख्यात साहित्यकारों और संपादकों ने शुक्रवार को सच्चिदानंद जोशी के नए कहानी संग्रह पुत्रिकामेष्टि के … Read more